[kannauj] - छह दिसंबर तक शुरू हो जाएगा श्रीराम मंदिर निर्माण- रामभद्राचार्य

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कन्नौज। पद्म विभूषण जगदगुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने शुक्रवार को एक बार फिर दोहराया कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण इसी वर्ष छह दिसंबर तक शुरू हो जाएगा। सुप्रीम कोर्ट से रामभक्तों के अनुकूल ही निर्णय आएगा। यदि ऐसा नहीं होता है तो संसद में प्रस्ताव पारित कर मंदिर निर्माण कराया जाएगा। उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनावों में फिर से भाजपा सरकार बनने की भविष्यवाणी की।

शुक्रवार को सर्किट हाऊस में पत्रकारों से बातचीत में उन्हाेंने एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सही ठहराया। कहा, देश की राजनीतिक पार्टियां वोट की राजनीति करती हैं। इसलिए देश में यह हालात पैदा हुए। भारत सरकार को फैसले के बाद रिव्यू दाखिल नहीं करना चाहिए। यह गलत किया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से निर्दोषों की रक्षा होगी।

उन्हाेंने कहाकि यदि यही स्थिति रही तो सवर्ण व असवर्ण के बीच संघर्ष बढ़ेगा। इसे कोई नहीं बचा पाएगा, न मोदी, न अखिलेश, न मायावती और न राहुल गांधी। अभी भी समय है सुधर जाना चाहिए। यह कौन सी बात हुई कि जिसके अंक 99 फीसदी हैं, वह जूते सिले और चार फीसदी वाले डॉक्टर बन जाएं। राजनेता कहते हैं कि जातिवाद मिटाओ, अरे इन कुर्सी वालाें से कोई पूछे कि जातिवाद कौन फैला रहा है। जाति के नाम पर आरक्षण देकर जातिवाद फैलाने का काम सरकार करती है। अब समय आ गया है, जब जातिगत आरक्षण खत्म कर आर्थिक दृष्टिकोण से आरक्षण दिया जाए। इस मौके पर खनन राज्यमंत्री अर्चना पांडेय, डीएम रवींद्र कुमार, सदर एसडीएम शालिनी प्रभाकर, सदर तहसीलदार आरके राजवंशी, भाजपा नेता प्रशांत त्रिपाठी, पूर्व विधायक बनवारी लाल दोहरे, अजय द्विवेदी समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

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पहले नहीं था जातिवाद

स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज बोले, पहले जातिवाद नहीं था, मैने प्रथम श्रीराम कथा सात वर्ष की अवस्था में 14 जनवरी 1957 में कही थी। हमारे यहां हल चलाने आते थे एक हरिजन बंधु, राम अधार नाम था उनका, मैं उन्हें काका बोलता था, मां उन्हें रोटी खिलाती थी, पानी पीेते थे, मैं उन्हें कथा सुनाता था। पहली श्रीराम कथा मैने उन्हें ही सुनाई, दक्षिणा में वह मुझे कंधे पर बैठाकर बाग का चक्कर लगवाते थे। एक बार गलती से मेरे मुंह से उनका नाम निकल गया तो बाबा ने कान एेंठ दिए थे। यह सामंजस्य था। वैदिक साहित्य में छुआछूत, जातिवाद का प्रकरण था ही नहीं।

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जयचंद की करतूत से कन्नौज पर लगी कालिख

कन्नौज ने कई साहित्यकार, कवि हुए। एक कवि हर्ष हुए, उनका संस्कृ त में एक महाकाव्य है। संस्कृत ऐसा कठिन काव्य कोई नहीं है। 13वां सर्ग इतना कठिन है कि एक-एक पंक्ति से पांच-पांच अर्थ निकलते हैं। लेकिन एक बदनामी है जो मेटे नहीं मिट रही है। वह है, जयचंद्र जिसने मोहम्मद गोरी को बुलाया, मैं साक्ष्य दे सकता हूं।

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पहले हम भारतीय...

स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज बोले, ऋग्वेद का एक वाक्य है। इसमें साथ चलो, साथ बोलो और साथ में ही चिंतन करो की सीख दी गई है। उपनिषद में कहा गया है कि भगवान हमारी साथ में रक्षा करें, साथ में पालन करें, हम साथ में ही पराक्रम करें। हमारी संस्कृति ही साथ की है। पहले हम भारतीय हैं, फिर चाहे जो हाें। अपने स्वार्थों के लिए कुछ न करो, भारत माता की रक्षा के लिए, संस्कृति के लिए एकजुट रहो।

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