[lakhimpur-kheri] - शासन ने जारी किया अध्यादेश, अब अभिभावकों को कार्रवाई का इंतजार

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मिशन एडमिशन

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शासन ने जारी किया अध्यादेश, अब
अभिभावकों को कार्रवाई का इंतजार
20 हजार से ज्यादा फीस वसूलने वाले स्कूल आए जद में
- अब अभिभावकों को जमा की गई फीस वापसी की चिंता
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी।
कॉन्वेंट स्कूल क्वालिटी शिक्षा के नाम पर अभिभावकों से मनमानी फीस वसूल रहे हैं। इस पर अंकुश लगाने के लिए शासन ने मंगलवार को शुल्क निर्धारण अध्यादेश जारी कर दिया। इसकी जद में 20 हजार से अधिक का शुल्क एक साल में लेने वाले स्कूल आएंगे। अध्यादेश जारी होने से अभिभावकों ने राहत महसूस की है। अभिभावकों का कहना है कि अब स्कूल न तो हर साल मनमाने तरीके से फीस ही बढ़ा पाएंगे और न ही स्कूल से ड्रेस और कोर्स ही बेच पाएंगे। शासन की ओर से जारी शुल्क निर्धारण अध्यादेश-2018 में स्कूलों की मनमनी पर लगाम लगाई है, जिससे अभिभावकों को राहत मिल सके। इसमें फीस वृद्घि, कोर्स एवं ड्रेस के लिए दुकानें निर्धारित करने और वहीं पांच साल तक ड्रेस के बदलने पर भी रोक लगा दी है। अध्यादेश में कोर्स और ड्रेस खरीदने के लिए दुकान की बाध्यता खत्म करने पर दोनों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। यहां बता दें कि जिले में करीब 40 कान्वेंट स्कूल हैं, जो मनमानी फीस वसूलते हैं।

यह है शुल्क संरचना
किसी भी क्लास की फीस बीस हजार रुपये से अधिक नहीं होगी और शुल्क संरचना दो भागों में होगी। एक संभावित शुल्क संगठक होगा, जिसमें पंजीकरण शुल्क, संयुक्त वार्षिक शुल्क और दूसरा वैकल्पिक शुल्क संगठक होगा, जिसमें बस का किराया, बोर्डिंग, मेस, डाइनिंग, शैक्षणिक भ्रमण आदि मद रखे गए हैं। छात्र ये शुल्क उसी दशा में देगा जब वह उन सुविधाओं का लाभ लेगा, लेकिन यह छात्र के लिए अनिवार्य नहीं होंगे।

मनमानी फीस वृद्घि पर पाबंदी,
पांच साल में बदलेगी ड्रेस
अध्यादेश के अनुसार स्कूल साल में पांच प्रतिशत से अधिक शुल्क नहीं बढ़ा सकेंगे। अन्य मदों को मिलाकर सात से आठ प्रतिशत ही बढ़ोतरी होगी। स्कूलों को कक्षा 12 तक की फीस वेबसाइट पर प्रदर्शित करनी होगी। फीस निर्धारण का आधार वर्ष 2015-2016 होगा। वहीं हर साल एडमिशन एवं कैंपिटेशन फीस नहीं ली जा सकेगी और स्कूल पांच साल से पहले ड्रेस भी नहीं बदल सकेंगे।

निर्णय न मानने पर रद्द होगी मान्यता
स्कूलों की जवाबदेही तय करने के लिए मंडलायुक्त की अध्यक्षता में समिति गठित होगी। मंडलीय समिति का निर्णय न मानने पर स्कूल प्रबंधन को पहली बार एक लाख, दूसरी बार पांच लाख रुपये का जुर्माना लगेगा और उसके बाद अवहेलना करने पर मान्यता रद्द की कार्रवाई की जाएगी।

फीस बढ़ाने की 60 दिन
पहले देनी होगी सूचना
स्कूल संचालकों को फीस बढ़ाने की सूचना अभिभावकों 60 दिन पहले देनी होगी। सत्र शुरू होने से पहले स्कूल वालों को फीस वृद्घि की सूचना नोटिस बोर्ड पर चस्पा करते हुए स्कूल की वेबसाइट पर भी अपलोड करनी होगी।

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सख्ती से हो नियमों का पालन
अध्यादेश का सख्ती से पालन कराया जाए। इसके लिए जिले के अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय की जाए। बच्चे के वजन से ज्यादा कोर्स का वजन हो जाता है। सरकार को चाहिए एनसीईआरटी का ही कोर्स स्कूल में अनिवार्य करे।
- पिंकी तिवारी निवासी सलेमपुर कोन

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अभिभावकों को मिलेगी राहत
कोर्स, ड्रेस हो या फिर टाई, बेल्ट और डायरी इन्हें खरीदने के लिए स्कूल खूब मनमानी करते हैं। दुकानदार भी कोर्स और ड्रेस में भी खूब लूटते हैं। जारी अध्यादेश से स्कूल संचालकों की मनमानी पर रोक लगेगी और अभिभावकों को राहत मिलेगी।
- अंकू सिंह, अरविंद नगर कॉलोनी

निजी स्कूलों के खिलाफ प्रदर्शन 12 को
निजी स्कूलों की मनमानी के विरोध में सरदार पटेल युवा सेवा संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष सरोज वर्मा ने बुधवार को तहसील सभागार में बैठक की। उन्होंने निजी, जिसमें खासकर कॉन्वेंट स्कूलों द्वारा वूसल की जा रही मनमानी फीस पर नाराजगी जताई और अभिभावकों को जागो अभिभावक जागो के लिए प्रेरित किया। बैठक में तहसील बार संघ के पूर्व अध्यक्ष राजीव मिश्रा ने सभी अभिभावकों से 12 अप्रैल को तहसील सभागार में सुबह नौ बजे इकठ्ठा होकर कलक्ट्रेट तक पैदल मार्च में शामिल होने का आह्वान किया। बैठक में वीरेश वर्मा, यदुवेंद्र पम्मू, हरजीत सिंह, मुन्नालाल राज, पंकज जायसवाल आदि मौजूद रहे।

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