[ludhiana] - ऐही हाल रिहा तां अग्गे तो नहीं लावांगे खीरे दी फसल

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किसानों का खीरा चालीस पैसे किलो बिका
किसान बोले, ऐही हाल रिहा तां अग्गे तो नहीं उगावांगे खीरे दी फसल
अमर उजाला ब्यूरो
संगरूर।
जे ऐही हाल रिहा तां अग्गे तो खीरे दी फसल लाउण तों किसान तौबा कर देणगे। क्योंकि किसानां दा खीरा मंडी विच चालीस पैसे किलो बिक रिहा है। कुछ ऐसा ही कहना था उन किसानों का, जिन्होंने इस बार फसली चक्कर से निकलकर खीरे की फसल की बड़े स्तर पर बुआई की थी किंतु भाव अच्छा न मिलने के कारण किसान अब निराश हो रहे हैं।
सलाद में अपना विशेष स्थान रखने वाले खीरे की कीमतें इस बार काफी नीचे गिर गई। बाजार में इस समय खीरा दस रुपये में दो किलो बिक रहा है। मंडी में किसानों को इसकी कीमत चालीस पैसे किलो से भी कम मिल रही है, जिससे किसान काफी परेशान हैं और उन्हें आर्थिक संकट अपने सिर पर मंडराता दिख रहा है। गांव कोलसेडी के किसान जसवीर सिंह ने बताया कि इस बार उसने अपने खेत में गेहूं की जगह चार बीघा जमीन पर खीरे की फसल की बुआई की थी, क्योंकि उसे उम्मीद थी कि सब्जियां लगाकर उसे अच्छा मुनाफा होगा जिससे उसके आर्थिक हालात सुधर जाएंगे किंतु ऐसा नहीं हुआ।
उसने बताया कि खीरे की कीमतें बेहद गिर गई हैं। घरों तक पांच रुपये किलो बिकने वाला खीरा उन्हें मंडी में चालीस पैसे किलो से भी कम बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि उनका खीरे की फसल लगाने पर काफी खर्च हुआ। अब खर्च भी पूरा नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे ही हालात बने रहे तो वह अपनी फसल को पशुओं को डालने के लिए मजबूर हो जाएंगे और भविष्य में कभी किसी को भी ऐसी सब्जियां लगाने की सलाह तक नहीं देंगे।
बुजुर्ग किसान जसमेल सिंह ने यूं तो वह पिछले काफी समय से सब्जियों की बिजाई करते आएं हैं। इस बार खीरे की कीमत ठीक न मिलने के कारण वह निराश हैं। सूबे की बड़ी सब्जी मंडियों में शुमार मालेरकोटला की मंडी में उन्हें अपने खीरे की फसल की कीमत महज एक रुपये किलो मिल रही है। उन्होंने इस फसल को पालने के लिए दिन रात मेहनत कर और काफी खर्च किया है।

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