🤞 फैसले उसके...😟

  |   Shayari
  1. 😔 चमन में जो भी थे नाफ़िज़ उसूल उसके थे,😞
    तमाम कांटे🌵 हमारे थे और फूल 🌷 उसके थे।🙂

😔 मैं इल्तेजा भी 🙏 करता तो किस तरह करता,
🌇शहर में फैसले सबको कबूल उसके थे।🙂

  1. 🤷‍♂️​क्या गिला 🤦‍♂️​ करें उनकी 🗣️ बातों का,
    🤷‍♂️​क्या शिकवा करें उन रातों से​​​।🌚

​​कहें 🗣️ भला किसकी खता इसे हम​,😔
😏 ​​कोई खेल गया है मेरे जज्बातों से​।😕

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