[harda] - 6531 ने कर्ज अदायगी पर सहमति जताई, जमा 2992 ने ही किया

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हरदा. सहकारी समितियों की मोटी रकम सालों से दबाकर बैठे किसान सदस्य सरकार द्वारा ब्याज माफ करने के बावजूद इसे जमा कराने में रुचि नहीं ले रहे हैं। जिले के ११३७९ किसानों पर समितियों का ५८ करोड़ ४५ लाख रुपए बकाया था। ब्याज माफी की घोषणा के बाद इनमें से ६५३१ ने समितियों के माध्यम से सहकारी बैंक को मूलधन अदायगी की सहमति भी दी, लेकिन जमा २९९२ ने ही किया।

चुनावी साल में किसानों रिझाने तथा सहकारी समितियों की माली हालत दुरुस्त बनाने के लिए सरकार ने इस साल अप्रैल में मुख्यमंत्री कृषि ऋण समाधान योजना लागू ब्याज माफ करने की घोषणा की थी। इससे उम्मीद जगी थी कि समितियों का किसानों पर सालों से बकाया मूलधन वापस मिलेगा, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। अप्रैल में शुरू हुई योजना के तहत 30 जून २०१७ तक के डिफाल्टर किसानों को लाभ मिलना था। महीनेभर में १२५० किसानों ने ही ४ करोड़ 30 लाख रुपए मूलधन जमा किया था। इसके बाद शासन ने इसकी अंतिम तिथि बढ़ाते हुए 31 जुलाई की, ताकि ज्यादा किसान योजना का लाभ ले सकें। सहकारी बैंक के अमले ने बकाया वसूली के भरसक प्रयास किए, लेकिन स्थिति में कोई खास सुधार नहीं आया। योजना समाप्त होने के चार दिन पहले यानि २६ जुलाई तक २९९२ किसानों से १० करोड़ २८ लाख ४३ हजार रुपए मूलधन ही जमा कराया जा सका।...

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