[jaipur] - जहां पर गाय करती थी दुग्धाभिषेक और भगवान ​कृष्ण भी आए

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जयपुर

अति प्राचीन अम्बिकेश्वर महादेव मंदिर, आमेर जहां पर ऐसी मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण भी आएं थे और नंदबाबा के साथ भगवान भोलेनाथ की पूजा की थी। इसी तरह से एक मान्यता यह भी है कि एक गाय खुद ही जाकर एक जगह पर दूध खाली कर देती थी। ग्वाले ने जब इस स्थान पर खुदाई की तो यहां पर शिवलिंग मिला। इतिहासकारों के अनुसार काकिलदेव देव जो सन्1036 में गद्दी पर बैठे और दो साल तक राजा रहे उन्होंने मंदिर का निर्माण करवाया।

मंदिर की कहानी-

वैसे तो मंदिर के बारे में कई किवदंतियां हैं। ऐसा कहा जाता है कि एक गाय जंगल में चरने जाती थी, तो वहां दूध खाली करके वापस आ जाती थी। एक बार ग्वाले ने गाय का पीछा किया और उस जगह को जाकर देखा। इस बारे में जब महाराज काकिलदेव को पता चला तो उन्होंने खुदाई करवाई। इस दौरान वहां पर जमीन के नीचे शिवलिंग मिली। सावन-भादों माह में जमीन के नीचे से पानी आता है और इसी से भगवान शिव का अभिषेक होता है। इतिहास के जानकार आनंद शर्मा बताते हैं कि पहले यहां पर शमशान हुआ करता था। यह शहर का एकमात्र शिवालय है, जहां पर शिवलिंग जमीन के नीचे है। वहीं किवदंती तो यह भी है कि भगवान श्रीकृष्ण नंदबाबा के साथ अम्बिका वन में आए थे। उन्होंने यहां पर पूजा भी की थी। इसका एक प्रमाण नाहरगढ़ की पहाड़ियों में बने चरण मंदिर को भी माना जाता है जहां पर भगवान श्रीकृष्ण की पदचिन्ह होने की मान्यता है और इनकी पूजा होती है।...

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