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मालगाड़ी बनीं ‘बैलगाड़ी’, करोड़ों का नुकसान

झांसी। रेल मंडल में मालगाड़ी की चाल बैलगाड़ी की तरह हो गई है। मुख्य ट्रैक पर धौलपुर से आगासौद तक (330 किलोमीटर) एक मालगाड़ी ले जाने में 12 से 18 घंटे लग रहे हैं। इस दूरी को तय करने में छह ड्राइवर और तीन गार्ड (रनिंग स्टाफ) को अपनी ड्यूटी निभानी पड़ रही है। इससे रनिंग स्टाफ के कर्मचारी तो परेशान हैं ही, रेलवे को भी करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

दिल्ली-भोपाल मुख्य ट्रैक पर धौलपुर से आगासौद का सेक्शन झांसी रेल मंडल में आता है। इस सेक्शन में चलने वाली मालगाड़ियों के गार्ड और ड्राइवर (चालक) रनिंग स्टाफ को झांसी में बदला जाता है। शुक्रवार की शाम 6.25 बजे चावल से भरी एक मालगाड़ी को झांसी से बीना ले जाने के लिए गार्ड, चालक और सह चालक ने साइन ऑन किए थे। उनको मालगाड़ी रात 8.30 बजे मिली। वे मालगाड़ी को न्यू यार्ड में ले गए, जहां मालगाड़ी का इंजन बदला गया। रात 12.50 बजे वह बीना की तरफ बढ़े। ड्यूटी के दस घंटे पूरा होने पर रनिंग स्टाफ ने सुबह 5.13 बजे मालगाड़ी को जाखलौन स्टेशन पर खड़ा कर दिया। मालगाड़ी को खड़ा करने के बाद संबंधित स्टाफ सवारी गाड़ी में बैठकर झांसी आ गया। वहीं, झांसी से दूसरा रनिंग स्टाफ भेजकर जाखलौन स्टेशन से मालगाड़ी को आगे बढ़वाया गया। ...

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