[nagda] - इन्हें मिला नया स्थान... देखने को मिलेगे विक्रमादित्य के जमाने के सिक्के

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महिदपुर. आयुक्त उज्जैन संभाग की अध्यक्षता में 4 जून को हुई क्षिप्रांजली न्यास की बैठक में सर्वानुमति से महिदपुर की अश्विनी शोध संस्थान एवं शंखोद्वार समिति को विक्रमादित्य संबंधी मुद्राओं के पुरातत्वीय प्रमाण समान्यजन के समक्ष लाने के लिए प्रदर्शनी हेतु विक्रम कीर्ति मंदिर उज्जैन स्थित पुरातत्व संग्रहालय भवन के उपर का रिक्त हॉल देने का निर्णय लिया था। इस पर संज्ञान लेते हुए क्षिप्रांजलि न्यास के सचिव एवं उज्जैन कलेक्टर ने अस्थाई तौर पर उक्त हॉल अश्विनी शोध संस्थान एवं शंखोद्वार को उपयोग करने हेतु आदेश जारी कर दिये है।

संस्था के निदेशक डॉ. रामचन्द्र ठाकुर एवं सचिव डॉ. रमण सोलंकी ने पत्रिका से चर्चा के दौरान बताया कि संभागीय मुख्यालय पर नगर की शोध संस्था को विक्रमादित्य को अंग्रेज कपोल कल्पित कहानी का पात्र ही मानते थे। संस्था ने उनके इस भ्रम को तोड़ते हुए अनेक पुरातात्विक साक्ष्य एकत्रित कर प्रमाणित किया कि अग्रेजी सन् प्रारंभ होने के 57 वर्ष पूर्व से विक्रम संवत् अस्तित्व में है। इसके पक्ष में अनेक सिक्के, शिलालेख सहित राजा विक्रमादित्य की मोहर (सील) आदि संस्था के पास मौजूद है। वहीं मध्यप्रदेश शासन की ओर से स्थापित महाराजा विक्रमादित्य शोध में विगत पांच वर्षो से अश्विनी शोध संस्थान द्वारा उपलब्ध कराई गई सामग्रियों पर अनेक पुरातत्ववेत्ता शोध एवं अनुसंधान कार्य कर रहे है।...

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