[raipur] - इंटरनेश्नल टाइगर डे : कभी उपहार में लिए-दिए जाते थे बाघ के शावक, अब केवल चिडियाघरों में दिखते है बाघ

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राजकुमार सोनी@रायपुर . छत्तीसगढ़ में पचास साल पहले बाघों के शावक उपहार में लिए-दिए जाते थे। आदिवासी और रसूखदार लोग बाघ को घरों में पालते थे, लेकिन अब छत्तीसगढ़ के असली जंगलों में बस कागजी बाघ पाए जाते हैं। गनीमत है कि पड़ोसी राज्यों के बाघ कभी-कभी छत्तीसगढ़ आ जाते हैं। यहां के जंगलों में कितने बाघ हैं, गिनती पूरी होने का इंतजार कीजिए।

झूठ के सहारे बाघ

अविभाजित मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में लगभग 20 साल तक वाइल्ड लाइफ बोर्ड के सदस्य रहे प्राण चड्डा ने एक बड़ा खुलासा किया है कि वर्ष 1995 में वन महकमे के अभ्यारण्य प्रभारी एम.आर. ठाकरे ने अचानकमार को टाइगर रिजर्व बनाने के लिए 27 बाघ की मौजूदगी का काल्पनिक आंकड़ा देते हुए रिपोर्ट तैयार की थी। यह रिपोर्ट प्राण चड्डा ने मध्यप्रदेश वाइल्ड लाइफ बोर्ड के समक्ष पेश की थी। चड्डा का कहना है कि बाघों की गिनती के मामले में छत्तीसगढ़ का वन महकमा तब के झूठ का सहारा लेकर अपनी नाक बचाता रहा है। अब भी यह आंकड़ा जस का तस है।...

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