[shahdol] - यहां हर एक दहाड़ पर बरसते हैं करोड़ों रुपए

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शहडोल. यहां वनराज की दहाड़ पर करोड़ों रुपए बरस रहे हैं। बाघों के दीदार के लिए हर साल यहां पर हजारों पर पर्यटक खिंचे चले आते हैं। इस टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा भी खूब फल फूल रहा है। यहां पर बाघों का कुनबा सैकड़ा पार कर चुका है तो पर्यटकों की संख्या भी लाख का आंकड़ा छूने को बेताब है। पर्यटकों की वजह से यहां पर करोड़ों रुपए की कमाई हो रही है। वल्र्ड टाइगर डे पर प्रस्तुत है रिपोर्ट।

नेशनल पार्क बांधवगढ़ के बाघों की दहाड़ अब नौरादेही सागर से लेकर उड़ीसा के सतकोशिया टाइगर रिजर्व तक सुनाई देने लगी है। पिछले मई और जून के महीने में यहां से पांच बाघों को दूसरे टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किया गया है। जिसमें एक वन विहार भोपाल, दूसरा मुकुन्दपुर रीवा, तीसरा संजय टाइगर रिजर्व सीधी, चौथा नौरादेही सागर और पांचवा सतकोशिया उड़ीसा भेजा गया है। अगर दूसरे रिजर्व टाइगर में बाघ नहीं मिलते हैं तो अभी दो बाघ बांधवगढ़ से सतकोशिया उड़ीसा और भेजे जा सकते हैं। इसके लिए मप्र और उड़ीसा सरकार के बीच समझौता हो चुका है। रिजर्व टाइगर नौरादेही सागर और सतकोशिया बाघ विहीन होते जा रहे हैं। जहां अब बांधवगढ़ के बाघ से रिजर्व टाइगर गुलजार होगा। इसके पहले बाघ विहीन हो चुके रिजर्व टाइगर पन्ना बांधवगढ़ के बाघों से ही अपनी पहचान वापस बना सका है। ...

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