[bageshwar] - भल-भल रूप बनाया हो बरूआ नारादा...

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कौसानी (बागेश्वर) । ग्राम पंचायत छानी-ल्वेशाल गांव में सातूं आठूं की धूम मची हुई है। सोमवार श्रद्धालु ढोल नगाड़ों और रणसिंघे की थाप पर केले के वृक्ष लाए। मंदिर की परिक्रमा के बाद वृक्ष के तना काटकर भगवती और पार्वती की मूर्ति का निर्माण किया गया। पंडितों ने वैदिक मंत्रों के साथ मूर्तियों में प्राण प्रतिष्ठा की। जगरियों ने मूर्तियों के निर्माण के समय भल-भल रूप बनाया हो बरूआ नारादा...समेत कई गीतों का गायन किया। अनुष्ठान का समापन 28 अगस्त को विशाल भंडारे के साथ होगा।

सोमवार को श्रद्धालु ढोल नगाड़ों के साथ छानी-ल्वेशाल गांव के एक हिस्से में गए। वहां देव डांगरों ने अवतरित होकर केले के पेड़ों में चावल डाले दो पेड़ों के हिलते ही श्रद्धालुओं ने पेड़ों को उखाड़ा। इसके बाद वह माता के जयकारा के साथ पेड़ों को अपने कंधे में रखकर मंदिर तक लाए। मंदिर की परिक्रमा के बाद पेड़ों की पूजा अर्चना की। पंडितों ने पेड़ों के तना काटकर मंत्रोचार के जरिए भगवती और पार्वती की मूतियों का निर्माण किया। श्रंगार करके उनमें प्राण प्रतिष्ठा की गई। मंदिर परसिर में पारंपरिक झोड़ा गायन शुरू हो गया है। मेलार्थियों ने ब्यौजी जाओ खोई का गणेशा...,उठ जाओ हे गणपति देवा...,समेत कई मनभावन गीतों का गायन किया। पूजा कमेटी के गुंसाई सिंह दोसाद ने बताया कि 28 अगस्त को मूर्ति विसर्जन के साथ ही भंडारा होगा। उन्होंने लोगों से भंडारे में बढ़चढ़कर शामिल होने की अपील की।

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