[bijnor] - बज्म-ए-अदब की ओर से आयोजित मुशायरा

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‘जाने क्यों आदमी हालात से डर जाता है’

नजीबाबाद। बज्म-ए-अदब की ओर से आयोजित मुशायरे में शायरों ने सामाजिक और राजनीतिक हालात पर कलाम पेश किए। उर्दू अदब की खिदमत के लिए शायरों को सम्मानित किया गया।

बज्म-ए-अदब कोटद्वार महेंद्र अश्क की अध्यक्षता और कारी शुएब के संचालन में आयोजित मुशायरे में अख्तर मुल्तानी का कलाम जाने क्यों आदमी हालात से डर जाता है..., डॉ. आफताब नोमानी का कलाम आऊंगा लौटकर मैं..., डॉ. इल्यास का कलाम अगर मेहमां नवाजी की रिवायत घर में बाकी है... पसंद किया गया। मुशायरे में मुंशी अली हसन, समर जाफरी, डॉ. इफ्तेखार, अब्दुल हई सबा, शेर हुसैन उर्फी, कारी शुएब नफीस, काजी विकाउलहक, कारी शाकिर रिजवी, मो. अदनान, अब्दुल हई सबा ने अपना कलाम पेश किए। उर्दू अदब की खिदमत के लिए महेंद्र अश्क, अख्तर मुल्तानी सहित कई शायरों को सम्मानित किया गया। मुशायरे में मो. जाहिद, कारी मरगूब रहमानी, कारी महबूब आलम, मौलाना सलीम, शेख इरशाद, शेख राशिद, दिलशाद मंसूरी, इकबाल अंसारी, कसीम अहमद उपस्थित रहे।

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