[chhatarpur] - जिन आरोपियों की रिट हाइकोर्ट से खारिज हुई, पुलिस ने उन्हें ही दे दी क्लीन चिट

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नीरज सोनी

छतरपुर। बैंक ऑफ इंडिया में हुए करोड़ों रुपए के किसान क्रेडिट कार्ड घोटाला के मामले में पुलिस की भूमिका सवालों से घिर गई है। जिन आरोपियों की रिट पिटीशन हाईकोर्ट से खारिज कर दी गई और इनमें से एक आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका तक हाईकोर्ट से खारिज हो गई, उन दोनों आरोपियों के नाम सिटी कोतवाली पुलिस ने अपने अंतिम प्रतिवेदन से हटा दिए हैं। जबकि शेषन कोर्ट में २६६/१५ के तहत इसी मामले में ट्रॉयल चल रहा है। वहीं पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद जो फाइनल चालान कोर्ट में पेश किया था, उसमें भी आरोपी अमित पटैरिया और मंजूलाल पटैरिया के नाम शामिल थे। लेकिन विवेचना का हवाला देकर इन आरोपियों के चालान कोर्ट में पेश नहीं किए गए। बाद में पूरक चालानों से उनकी जांच का हवाला दिया जाता रहा। अंतिम चालान में वरिष्ठ पुलिस अधिकरियों की जांच का हवाला देकर अमित और मंजूलाल के नाम हटाकर ९ जून २०१८ को कोतवाली पुलिस ने जब अंतिम चालान पेश कर दिया। जबकि पूर्व एएसपी नीरज पांडे ने अपने जांच प्रतिवेदन में इस बात का जिक्र किया था कि अमित पटैरिया द्वारा जबलपुर हाईकोर्ट में दायर रिट में अभी अंतिम निर्णय पारित नहीं किया गया है। लेकिन पुलिस ने अधूरी विवेचना को ही आधार बनाकर अमित और मंजूलाल तिवारी ने नाम केस से अलग कर दिए। जबकि हाईकोर्ट ने अमित व मंजूलाल की रिट को खारिज करते हुए शेषन ट्रायल का सामना करने के लिए कहा हैा। लेकिन यह आरोपी कोर्ट में पेश नहीं हुए। यही कारण है कि कोतवाली पुलिस के इस कदम के बाद से बैंक के तत्कालीन सहायक प्रबंधक रमन रिछारिया को न्याय की उम्मीद खत्म होते दिखने लगी थी। तभी से वह उन्हें अमित-मंजूलाल को मारकर और खुद को खत्म कर लेना चाह रहा था। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से न्याय की उम्मीद खत्म होने के बाद खुद की जान दे दी। इधर इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए रेंज डीआईजी अनिल महेश्वरी ने केस डायरी सहित सीएसपी और टीआई कोतवाली को तलब किया है।...

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