[dhar] - सिर्फ 108 का ही ध्यान रखे आत्मा का कल्याण हो जाएगा- आचार्य ऋषभचंद्रसूरि

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सिर्फ 108 का ही ध्यान रखे आत्मा का कल्याण हो जाएगा- आचार्य ऋषभचंद्रसूरि

राजगढ़.

आचार्यदेवेश ऋषभचंद्रसूरीश्वर ने कहा कि जीवन में गुरु द्वारा प्रदत्त ज्ञान और पाठ को अंगीकार करना है धर्म जीवन में उतारना है तो धर्म का मूल पाठ क्रोध मत करों वाले सिद्धांत को अंगीकार करना पड़ेगा। व्यक्ति माया मृशावाद के चलते झूठ बोलता है लोभ अहंकार से तुष्टि नहीं होती है। मोह के 16 सामंत है व्यक्ति कशायों में इतना डूबा रहता है कि वह जो बाह्य धर्मक्रिया करता है वह धर्म क्रिया लोक संतुष्टि और सिर्फ प्रदर्शन वाली ही साबित होती है । हम संसार में उपभोग के लोभ के कारण भटक रहे है और प्रभु की देशना को नहीं अंगीकार कर पा रहे है । मैं कौन हूं ? कहां से आया हूं ? कैसे उत्पन्न हुआ हूं ? और मेरा स्वरुप क्या है ? ऐसा चिंतन हमेशा चलते रहना चाहिए। प्रभु और परिवार में दोनों में से किसी एक का चयन करना पड़े तो व्यक्ति परिवार का चयन करता है। प्रभु को भूल जाता है। प्रभु के प्रति आत्मीयता के भाव कम होते नजर आ रहे है। सिर्फ एक प्रभु प्रतिमा की पूजा एकाग्र भाव से कर ली जाए तो वह कल्याण कारी सिद्ध होती है जबतक शरीर में प्राण है तब तक संसार में उपयोगिता है। प्राण निकलने के पश्चात् शरीर शव में परिवर्तित हो जाता है और उसकी उपयोगिता समाप्त हो जाती है। जिस प्रकार 108 एंबुलेंस में बैठकर जाने से गंभीर मरीज के प्राण बच सकते है। उसी प्रकार एम्बुलेंस रुपी प्रभु नाम की माला के 108 मणके का यदि हमने ध्यान रखा तो देवलोक के दूत लेने आएंगें और आत्मा का कल्याण निश्चित ही होगा।...

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