[gwalior] - ब्रांडेड दवा लिखकर मरीजों पर बेवजह बोझ डाल रहे डॉक्टर

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ग्वालियर. हाईकोर्ट के निर्देश, सरकार का आदेश और 2002 की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति से अलग डॉक्टरों ने अपने नियम बना रखे है। वे मानते हैं कि जेनेरिक दवाएं ठीक असर नहीं करती हैं। तभी तो वे जेनरिक दवाएं पर्चों में नहीं लिखते। पत्रिका ने निजी अस्पताल और क्लीनिक का संचालन करने वाले 6 डॉक्टरों द्वारा मरीजों के लिए लिखी गई दवाओं के पर्चे जुटाए तो एक भी डॉक्टर के पर्चे में जेनेरिक दवा लिखी नहीं मिली।

शहर के निजी अस्पताल जिनमें ओपीडी का संचालन किया जाता है। उनके और प्राइवेट क्लीनिक चलाने वाले डॉक्टरों द्वारा लिखे गए पर्चे पत्रिका ने जुटाए। सभी में ब्रांडेड दवा लिखी गईं।ये तो चंद उदाहरण हैं। लेकिन शहर के ९५ फीसदी डॉक्टर जेनेरिक दवा नहीं लिखते। इधर केंद्र सरकार के बार-बार निर्देश देने और एमसीआई की गाइडलाइन के 10 महीने बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। दवा कंपनियां सेमिनार की आड़ में डॉक्टरों से सौदा करती हैं। उन्हें अपने प्रोडक्ट के बारे में जानकारी देकर ब्रांडेड दवाएं ही लिखने के लिए कहती हैं। मेिडकल फील्ड से जुड़े लोगों का कहना है कि ब्रांड नेम से दवाएं लिखने के बदले कंपनियां डॉक्टरों को गिफ्ट और कैश देती हैं।...

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