[jaisalmer] - पुरखों का हुनर दिला रहा पहचान, पर्यटकों की भी पसंद

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जैसलमेर. पुरखों के हुनर ने न इन्हें पहचान दिलाई, बल्कि पर्यटन नगरी में सैलानियों को रिझाने का भी अवसर दिया। विश्व पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट पहचान बना चुके हुनरमंद कलाकारों में कई लोग ऐसे है, जो बाहर से आकर यहां बस गए। यहां उनकी कला को कद्रदान मिले और उनकी प्रतिभा की अनूठी छाप अब विदेशों तक सैलानियों के माध्यम से बन चुकी है। पर्यटन व्यवसाय से जुडकऱ अपनी कला को विदेशों तक पहुंचाने में इन कलाकारों को काफी मदद मिली है। पेन्टिंग कला से जुड़े रजनीश वैष्णव बचपन से ही चित्र उकेरने में रुचि रखते हैं। रजनीश वैष्णव को स्थानीय लोग बाबू भाई के नाम से जानते है। उनके दादा व पिता भी इसी कला से जुड़े थे। रजनीश ने अपने पिता से ये कला सीखी है। वे चित्रकला में कई प्रकार की पेंटिंग बनाते है और कई कलाओं का समिश्रण है। वे मिनेचर पेंटिंग, पिछवाई, मार्डन आर्ट व ट्रेडिशनल पेंटिंग बनाते है। इस कला में कपड़ो व कागज दोनो में ही चित्र उकेरे जाते है। कपड़ो व टी शर्ट में विभिन्न प्रकार के चित्र फेबरिक कलर से बनाते है, जैसे राजस्थानी वेष भूषा में महिला पुरुष, उंट, देवी देवताओं, किसी व्यक्ति का चेहरा आदि बनाते है। कई बार ग्राहको की डिमाण्ड के अनुसार भी पेंटिंग बनाकर देते है। साधारणतया कई टी-शर्ट पर पेंटिंग बनाते है, जिसे विदेशी पर्यटक बड़े चाव से खरीदते है। इन पर चित्र उकेरने के दौरान प्रयोग में लिया जाने वाला फेबरिक रंग धोने से खराब नहीं होते है। इसके अलावा फ्लोरसेंट कलर से तैयार की जाने वाली पेटिंग रात्रि में लाइट के साथ चमक उठती है।...

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