[kaushambi] - सावधान: बंजर हो रही दोआबा की धरती

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मंझनपुर। अंधाधुंध रसायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल से मिट्टी की सेहत बिगड़ रही है। खेत बंजर होने की तरफ बढ़ रहे हैं। इसका खुलासा मृदा परीक्षण केंद्र की रिपोर्ट में हुआ है। खरीफ की फसलों के लिए जिले के विभिन्न हिस्सों से लिए गए करीब 15 हजार नमूनों की जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई। करीब 90 फीसदी भूमि बीमार मिली। खेतों की मिट्टी में जीवांश कार्बन की भारी कमी पाई गई है। कई जरूरी तत्व या तो गायब मिले या न के बराबर है।

केंद्र सरकार के मृदा स्वास्थ्य परीक्षण योजना के तहत जिले की तीनों तहसीलों से खरीफ की फसलों के लिए तकरीबन 14993 खेतों से मिट्टी के नमूने लिए गए। कृषि विभाग के मृदा परीक्षण केंद्र में इनमें से तकरीबन 10850 की अब तक जांच की जा चुकी है। इसमें चौंकाने वाली जानकारी प्राप्त हुई है। ज्यादातर खेतों की मिट्टी में फसलों के लिए उपयोगी तत्व न के बराबर मिले। यूं कहें कि मिट्टी खेती लायक नहीं बची है। मृदा परीक्षण केंद्र के तकनीकी सहायक एवं प्रभारी अध्यक्ष राजेंद्र कुमार मौर्या ने बताया कि 90 फीसदी मिट्टी में जीवांश कार्बन एकदम निचले स्तर पर पहुंच गया है। खेतों की मिट्टी का जीवांश कार्बन करीब 0.37 होना चाहिए, लेकिन यहां इसका स्तर 0.2 प्रतिशत पर है। ज्यादातर खेतों में नाइट्रोजन और सल्फर आयरन की भी मात्रा न के बराबर पाई गई है। मिट्टी में फास्फोरस, पोटाश और जिंक भी मानक के अनुसार नहीं है। तकनीकी सहायक ने बताया कि मिट्टी में आयरन की जरूरत खुद-ब-खुद पूरी हो जाती है, लेकिन सल्फर और जिंक की भरपाई के लिए किसानों को गोबर की खाद में ट्राइकोडर्मा मिलाकर खेत में छिड़काव करने की जरूरत है। मिट्टी की खराब सेहत के लिए कृषि विशेषज्ञ जैविक खादों से दूरी और रसायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध इस्तेमाल को प्रमुख रूप से जिम्मेदार मान रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यही स्थिति बनी रही तो जल्द ही दोआबा के खेत बंजर हो जाएंगे।...

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