[mungeli] - देवी गंगा, लहर तुरंगा, अहो देवी के जसगीत धुन पर जगह-जगह हुआ भोजली का विसर्जन

  |   Mungelinews

मुंगेली. नगर सहित अंचल में भोजली का त्योहार हर्षोल्लास एवं धूमधाम से मनाया गया। भोजली मित्रता का प्रतीक है। जिस तरह युवा पाश्चाात्य संस्कृति का अनुसरण करते हुए फ्रेन्डशिप डे मनाते हैं और एक दूसरे के कलाई में फ्रेंडशिप बैंड बांधकर मित्रता का इजहार करते हैं। उसी तरह प्राचीन काल से छत्तीसगढ़ में भोजली देकर मित्रता को प्रगाढ़ करने की परंपरा है। लोकगीत व भोजली विसर्जन के दौरान महिलाएं सामूहिक रूप से गीत गाती हैं, जिसे भोजली गीत कहते हैं।

रक्षाबंधन के दूसरे दिन सोमवार को भोजली का पर्व शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। छत्तीसगढ़ी संस्कृति का निर्वाह करते हुए लोगों ने अपने घरों में रोपे गए भोजली को घर से नदी तक शोभायात्रा निकालकर ग्राम देवता की पूजा-अर्चना की और लोगों ने मितान बदकर सीताराम भोजली कहकर एक-दूसरे का अभिवादन किया। वहीं नगर के शंकर मंदिर में लोगों ने भोजली की पूजा अर्चना की गई। पूजा अर्चना पश्चात शोभायात्रा के साथ भोजली का विसर्जन स्थानीय भोजली आगर नदी में किया गया। ग्रामीण अंचलों में भोजली का पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि नागपंचमी के दिन छोटे बच्चे चुरकीए टुकनी में मिट्टी लाकर उसमें गेहूं की बिहई भिगोकर बोते हैं। फिर रक्षाबंधन के दूसरे दिन उसे नदी में विसर्जित करते हैं।...

यहां पढें पूरी खबर— - http://v.duta.us/_kURQgAA

📲 Get Mungelinews on Whatsapp 💬