[raipur] - आजो बाजत हे देवदास के मांदर

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गुरु बाबा घासीदास के अमर संदेस ल पंथी गीत म दुनियाभर म बगरइस भाई देवदास बंजारे ह। अमर होगे एके ठन रद्दा म रेंग के देवदास ह। पंथी माने देवदास बंजारे। चारों मुड़ा सोर उडग़े। धनोरा गांव के बेटा देवदास दुनियाभर के 64 बिदेसी मंच म जाके छत्तीसगढ़ के जस बगरइस। बाबाजी के संदेस फइलइस।

एक फरवरी 1947 के देवदास जनम लीस अउ 26 अगस्त 2005 के सतलोक चलदिस। जउन उमर म हिंदी के महान साहित्यकार परेमचंद गुजरिस उही उमर म देवदास ल ऊपरवाला अपन तीर बना लिस। अतेक कम उमर म वोहा अइसे काम करिस के जुग-जुग वोकर नांव चलही। गरीब बाप के बेटा देवदास नानपन ले नाचे-कूदे म हुसियार रहिस। पहली कबड्डी के खेलाड़ी बनिस। खेलते- खेलत माड़ी के कटोरी खसल गे। फेर उदिम धरिस भजन भाव के। गांव के लइकामन ल सकेल के बनइस पंथी दल-धनोरा। बुधारू वोकर कका के बेटा रहिस। वोला बनइस मंदरहा अउ अपन बनिस भजनहा। भजनहा याने गवैया अउ मुखिया नचकार। बाबाजी के सुमिरन म गाए गीत ल भजन केहे जाथे। वोकरे सेती पंथी गवैया भजनहा कहाथें। गावत बजावत पंथी दल धनोरा के संगीमन गांव-गांव गींन। गिरौदपुरी धाम म मिलिस सम्मान अउ रास्ट्रपति दिस सोन के पदक। धन्य होगे छत्तीसगढ़। 1995 म दू सौ कलाकार ल दिल्ली के गनतंत्र दिवस परेड म देवदास पंथी नचइस। रास्ट्रपति संकरदयाल सरमा घलो ह पंथी के धुन म अपन हथेरी ले अवाज निकारत देखे गीस।...

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