[raipur] - भोजली ह बढिय़ा फसल के परतीक ए

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छत्तीसगढ़ म लोक संस्करीति, लोक परब अउ लोक गीत ह रचे-बसे हाबय। इहां हर परब के महत्तम हे। भोजली घलो ह हमर तिहार के रूप म आस्था के परतीक हावय। भोजली ह एक लोक गीत हावय। सावन अंजोरी पाख के पंचमी तिथि ले के राखी तिहार के दूसर दिन याने भादो के पहिली तिथि तक भोजली बोय के बाद बड़ सरद्धा भकती-भाव से कुंवारी बेटीमन अउ नवा-नेवरिया माइलोगनमन गाथें। असल म ये समे धान के बोआई अउ सुरुवात के निंदाई-गोड़ाई के काम ह खेत म खतम होत्ती आये रहिथे। किसान के बेटीमन घर म बने बरसात अउ बने फसल के मनोरथ मांगे के खातिर फसल के परतीकात्मक रूप म भोजली के आयोजन करथे।...

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