[sant-kabir-nagar] - घाघरा के पानी से मची तबाही

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हैंसर। घाघरा नदी सोमवार शाम को भी खतरे के निशान से 79.35 से आठ सेंटीमीटर ऊपर 79.43 पर पहुंच गई। नदी के जलस्तर में हुई वृद्धि से बाढ़ से घिरे गांवों के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गांव में फंसे लोगों के सामने भोजन का संकट गहरा गया है। वहीं जिन चार गांवों के लोगों ने बांध पर शरण ले रखी है, उनके सामने भोजन के अलावा धूप व बारिश से बचने का भी कोई इंतजाम नहीं है। घाघरा नदी की बाढ़ के कारण गायघाट, गुनवतिया, चकदहा, ढोलबजा, सुअरहा, भौंवापार, सरैया, खरैया, दौलतपुर, धमचिया, सियाराम अधीन सिंह, सियरकला समेत 15 गांवों में एक पखवारे से पानी भरा है। इसमें से सियरकला, गायघाट, गुनवतिया और भौवापार गांव के लोग घर छोड़कर मवेशी समेत एमबीडी बांध व रिंग बांध पर शरण लिए हुए हैं। शनिवार से ही नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। सोमवार शाम को बढ़े जलस्तर के बाद गांवों में हालत और भी खराब हो गई। बाढ़ प्रभावित गांव के लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए प्रशासन ने छह नावों का इंतजाम कराया है। बंधे पर शरण लिए गोपाल, सीताराम, सुभाष, जयकरन, लालमन और बैजनाथ आदि का कहना है कि प्रशासन की तरफ से बाढ़ पीड़ितों की कोई मदद नहीं की जा रही है। प्रशासनिक उपेक्षा से बाढ़ पीड़ितों में गहरी नाराजगी है। इस संबंध में तहसीलदार वंदना पांडेय का कहना है कि नदी का जलस्तर बढ़ने की सूचना मिली है। निगरानी के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री वितरण के लिए जिला प्रशासन से मांग की गई है।

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