☹रेत पे हर कदम निशान बन गए😣

  |   Shayari

☹रेत पे हर कदम निशान बन गए,😣
😟ये जख़्म तेरे सितम की पहचान बन गए।🙁

😢आंसू पिलाके रूह को जिंदा तो कर लिया,😔
😐अब प्यास है इतनी कि बेजान बन गए।😑

😫अब तक तो मुझे तेरा सुराग न मिला,😩
🙁तुझे खोजने में खुद से ही अंजान बन गए।☹

😞लंबी उम्र थी लेकिन तेरे ही इश्क में,😔
🌎दुनिया में दो घड़ी के मेहमान बन गए।🕰

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