🤜समलैंगिकता गुनाह है या 👎नहीं, सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगा 👌फैसला,

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समलैंगिकता अपराध है या नहीं इस बड़े मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को अपना फैसला सुनाएगा। पांच जजों की संविधान पीठ इस मामले में सुनवाई कर रही है और अपना फैसला सुनाएगी।इस तरह के संबंधों को आईपीसी की धारा 377 के तहत अपराध माना गया है। कोर्ट में दायर याचिकाओं में इसे चुनौती दी गयी थी।

आईपीसी की धारा 377 अप्राकृतिक यौन संबंध को अपराध मानती है। इसके तहत पशुओं के साथ ही नहीं बल्कि दो लोगों के बीच बने समलैंगिक संबंध को भी अप्राकृतिक कहा गया है। इसके लिए 10 साल तक की सज़ा का प्रावधान है। हालांकि पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने 2009 में दो एडल्ट के बीच आपसी रजामंदी से एकांत में बने समलैंगिक संबंध को अपराध मानने से मना कर दिया था, लेकिन साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने कानून में बदलाव को संसद का अधिकार बता कर मामले में दखल देने से मना कर दिया था।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 5 समलैंगिक लोगों ने याचिका दाखिल कर मामले पर नए सिरे से सुनवाई की मांग की। इस साल जनवरी में कोर्ट ने इस मसले को संविधान पीठ में भेज दिया। बाद में कुछ और लोगों ने भी कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। संविधान पीठ ने सभी पक्षों को विस्तार से सुना और 17 जुलाई को फैसला सुरक्षित रख लिया।

कुछ धार्मिक संगठनों ने धर्म और सामाजिक मान्यताओं का हवाला देते हुए याचिका का विरोध किया। लेकिन केंद्र सरकार ने मसले पर कोई स्टैंड नहीं लिया। सरकार ने कहा कि वो इस मसले को कोर्ट के विवेक पर छोड़ती है। सरकार ने सिर्फ इतना आग्रह किया कि कोर्ट अपनी सुनवाई 2 एडल्ट्स के बीच आपसी सहमति से बने संबंधो तक सीमित रखे। पूरी धारा 377 की वैधता पर सुनवाई न हो।

यहां देखें फोटो-http://v.duta.us/2wx5ygAA

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