[ballia] - सभासदों का उग्र रुप देख, बैठक से भागे नपाध्यक्ष

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बलिया। चार महीने बाद बुधवार को हुई नगरपालिका परिषद बोर्ड की बैठक काफी हंगामेदार रही। बैठक शुरू होते ही सभासदों ने विकास के मुद्दे को लेकर नगरपालिका अध्यक्ष तथा अधिशासी अधिकारी को निशाने पर ले लिया। इसी बीच नगरपालिका की ओर से लगाए गए वीडियो कैमरा को भी सभासदों ने तोड़ दिया। काफी देर तक सभासदों के शांत नहीं होने पर ईओ तथा चेयरमैन कक्ष से बाहर निकल गए। प्रशासन के सामने नपा अध्यक्ष ने साफ तौर पर बोर्ड की बैठक कराने से मना कर दिया।

सभासदों ने आरोप लगाया कि नगरपालिका परिषद में करीब चार महीनों से बोर्ड की बैठक नहीं हुई जिससे नगर की साफ-सफाई के साथ ही विकास कार्य अधर में लटक गए। इससे नगर के सभी वार्डों के सभासद नाराज थे। सभासदों ने जिलाधिकारी सहित शासन के अफसरों को पत्र लिखकर बैठक कराने की गुहार लगाई थी। जिसके बाद डीएम के आदेश पर पांच सितंबर को भारी पुलिस बल तथा प्रशासन के अफसरों की मौजूदगी में बैठक शुरू हुई। सभासदों ने शुरू में ही बैठक को पूर्व की तरीके से कराने का मन बना लिया। कहा कि इस बैठक में बाहरी कोई व्यक्ति नहीं आएगा। इसी बीच नपा की ओर से लगाया गया वीडियो कैमरामैन पहुंचा और वीडियोग्राफी शुरू कर दी। इतना होते ही सभासद भड़क गए उसका कैमरा तोड़कर बाहर कर दिया। नपा सदस्यों का आरोप था कि नपा अध्यक्ष तथा ईओ द्वारा तमाम वित्तीय अनियमितताएं की गई हैं, जिसकी जांच होनी जरूरी है। ऐसे में नपा अध्यक्ष के जाने के बाद भी बोर्ड के सदस्यों ने सर्वसम्मत से पांच एजेंडों पर प्रस्ताव पारित कर दिया। जिसमें अध्यक्ष के वित्तीय अधिकार सीज कराने का निर्णय लिया गया। इनके द्वारा कराए गए वित्तीय अनियमितताओं की जांच होने तक वित्तीय आहरण पर बोर्ड ने रोक लगाने का प्रस्ताव भी पारित किया। पिछले बोर्ड की बैठक में एक करोड़ 47 लाख की फर्जी फाइलों को दुरुस्त कराकर इसका भुगतान नगरपालिका के सरकारी कोष से कराकर लूट करने का आरोप भी सभासदों ने लगाया। उनका कहना है कि विगत कई वर्षों से नपा के समस्त वार्डों की साफ-सफाई जलकल व विद्युत आपूर्ति में आठ लाख रुपये खर्च होती थी। जिसमें वर्तमान समय में 11 वार्डों की सफाई के नाम पर 32 लाख रुपये के ठेके पर आर्यन ग्रुप को दे दिया गया। बिजली आपूर्ति का ठेका अध्यक्ष और ईओ ने करोड़ों रुपये के अपने चहेते ठेकेदारों को दिया गया। जिस पर बोर्ड ने सर्व सम्मत से रोक लगाने का निर्णय लिया। इसी तरह अन्य पांच प्रस्तावों पर बोर्ड ने आपत्ति जताते हुए खारिज कर दिया। जबकि अधिशासी अधिकारी को एक लाख रुपये तक के कार्यो के भुगतान का अधिकार बोर्ड ने सर्व सम्मत से दिया। इसकी प्रतिलिपी प्रमुख सचिव नगर विकास, मंडलायुक्त आजमगढ़, सांसद, विधायक तथा एमएलसी को भेजा।

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