[bhopal] - ईश्वर तक पहुंचने का रास्ता बताता है ये ड्रामा

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भोपाल। शहीद भवन में द रिफ्लेक्शन सोसायटी फॉर परफॉर्मिंग आट्र्स एण्ड कल्चर ने नाटक 'चिमटे वाले बाबा' का मंचन किया गया। 1967 में लिखे गए नाटक का पहला शो 11 नवंबर 1968 में जिनेवा में हुआ था। अंतिम शो 1990 में दिल्ली में फैसल अलकाजी ने किया था। करीब तीस साल बाद इस नाटक का मंचन किया गया। एक घंटे 45 मिनट के इस नाटक में ऑनस्टेज 8 कलाकारों ने अभिनय किया है। नाटक की कहानी बताती है कि इंसान जीवन में सच और शांति की तलाश में हमेशा भटकता रहता है, लेकिन वह हमेशा गलत रास्तों का ही चुनाव करता है। वह जहां पहुचंना चाहता है, वह मार्ग उसे जीवनभर दिखाई ही नहीं देता।...

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