[bundi] - लावारिस बच्चे मिले तो किसे बताएं... जिले में नही चाइल्ड लाइन

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बूंदी. बडा आसान होता है यह लिखना कि मां अपने गुमशुदा बच्चे के बिछडने का गम झेल रही है, लेकिन बहुत कठिन होता है, उस मन की थाह ले पाना जिसका अपना कोई उसकी नजरों से ओझल हो गया हो। खासकर अगर वह बच्चा है तो परिवार के सदस्यों का कलेजा की फट जाता है। बूंदी जिले में अगर कोई लावारिस बच्चा किसी को मिले तो उसे उसके घर तक पहुंचाना कोई आसान काम नहीं है।

लावारिस बच्चे की पुलिस को सूचना देने पर सामान्यत: थानों से कोई मददगार जवाब नहीं मिलता है। पुलिसकर्मियों को बच्चों के साथ ‘डील’ करने का तरीका भी पता नहीं होता। ऐसे में मुसीबतशुदा बच्चों की मदद के लिए जरूरत होती है चाइल्ड हैल्प लाइन की और यही व्यवस्था बूंदी जिले में नहीं है। इसकी कमी बरसों से खल रही है। प्रशासन की जानकारी में भी है,लेकिन इसे शुरू करने लिए प्रयास नहीं हुए। नतीजा पुलिस की मानव तस्करी निरोधी यूनिट को यह काम करना पड़ रहा है। वे ही लावारिस बच्चों को उनके बिछडों से मिलवा रहे हैं।...

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