[chhatarpur] - 20 साल में भी नहीं बनाया ग्रीन बैल्ट, फिर भी हर दो साल में मिल रही पर्यावरणीय स्वीकृति

  |   Chhatarpurnews

छतरपुर. जिले के लवकुशनगर अनुभाग क्षेत्र की खनिज संपदा स्थानीय लोगों के जीवन के लिए ही नासूर बन गई है। जिन नियम और शर्तों पर शासन-प्रशासन से लेकर पर्यावरण विभाग ने खदान के लिए फॉच्र्यून स्टोन्स लिमिटेड कंपनी को लीज दी थी, वास्तविकता में उनमें से एक का भी पालन ठीक ढंग से नहीं किया गया है। पिछले २५ सालों से लवकुशनगर क्षेत्र के ग्राम कहटरा में चल रही ग्रेनाइट खदान में काम करने वाले मजदूरों की सिलकोसिस बीमारी से लगातार मौत हो रही हैं। जिन कारणों से मजदूरों को यह बीमारी हो रही है, उन्हें दूर करने के लिए कंपनी को जो मापदंड पूरे करने थे, वे कंपनी ने नहीं किए। यही वजह है कि मजदूरों की जान खतरे में पडऩे लग गइ्र। नियमानुसार जिस खदान की लीज दी गई थी उस क्षेत्र में काम शुरू करने से पहले ही फॉच्र्यून स्टोन्स लिमिटेड को ग्रीन वेल्ट विकसित करना था। खदान के चारों ओर सुरक्षा की द्रष्टि से बाउंड्रीवाल बनानी थी और खदान के चारों तरफ गालैंड के रूप में गहरी खादी खोदनी थी, ताकि बड़े पत्थर नीचे आने से पहले एक स्थान पर रुक सकें और पानी का बहाव न रुक पाए। लेकिन इनमें से किसी भी नियम का पालन नहीं किया गया। केवल रिकॉर्ड पर ग्रीन बेल्ट दर्शाकर हर दो साल में पर्यावरण मंत्रालय की स्वीकृति ली जा रही है। जबकि ग्रीन बेल्ट के नाम पर पूरे खदान क्षेत्र में एक भी पेड़ नहीं लगाया गया है। इससे खदान से उठने वाले धूल-धुएं के प्रदूषण से कटहरा सहित आस-पास के गांव के लोगों को सीधे जूझना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर खदान की निर्धारित लीज से भी ज्यादा क्षेत्र में उत्खनन करके जमीन के अदर तक से पत्थर निकाले जा रहे हैं। इससे यह खदान कटहरा गांव के पास तक पहुंच गई है। आने वाले समय में गांव के लोगों को अपने स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए यहां से विस्थापन करने की नौबत आ जाएगी।...

यहां पढें पूरी खबर— - http://v.duta.us/jYMbpQAA

📲 Get Chhatarpur News on Whatsapp 💬