[chhindwara] - मोगली की बूमरैंग का जलवा आस्ट्रेलिया में, अब भारत में है तैयारी

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छिंदवाड़ा. जंगल-जंगल बात चली है..गीत और मोगली के पास पंजानुमा बूमरैंग युवा और बुजुर्गों को जरूर याद होगा। करीब बीस साल पहले के कार्टून सीरियल में नजर आए मोगली का पात्र शेरखान से बचने के लिए इस हथियार का उपयोग करता है। उसी पंजा (बूमरैंग) के हथियार को खेल की कला में परिवर्तित करने का प्रयास किया है दिल्ली के विवेक मोन्ट्रोज ने।

छिंदवाड़ा के युवाओं को इस कला को सिखाने के सिलसिले में आए विवेक ने इसकी जानकारी दी। उनके मुताबिक बूमरैंग का प्रयोग आदिवासी जंगल में अपनी सुरक्षा के लिए करते थे। भारत में यह तकनीक विलुप्त हो गई है। इसका उल्लेख पेंच नेशनल पार्क के समीप जंगल ब्वॉय मोगली की कहानी में मिलता है। विवेक ने बताया कि पहला बूमरैंग उनकी आंटी ने आस्ट्रेलिया से लाकर दिया था। दिल्ली में कम स्पेस रहने के दौरान यह थ्रो नहीं कर पाते थे। वे 1995 में आस्ट्रेलिया गए,जहां उन्होंने थ्रो करना सीखा। इस दौरान कई बार चोट लगी। फिर भी इसे सीखने का जुनून से यह उनका पैशन बन गया। वे 15 साल की उम्र से यह थ्रो कर रहे हैं।...

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