[gadarwara] - नगर से लेकर गांवों तक दिखा बंद का असर बंद का व्यापक असर

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गाडरवारा। सरकार द्वारा एससी, एसटी एक्ट में संशोधन के विरुद्ध नागरिकों ने एकजुट होकर सरकार के निर्णय का विरोध किया। इसे लेकर गुरुवार को प्रस्तावित बंद का असर तहसील मुख्यालय गाडरवारा समेत आसपास के कस्बाई ग्रामीण क्षेत्रों में भी व्यापक रूप से दिखाई दिया। पहली बार लोगों ने स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर बंद का समर्थन किया। इस दौरान कोचिंग सेंटर, समस्त निजी स्कूल एवं पेट्रोल पंप भी बंद रहे। हालांकि गाडरवारा नगर में सुबह से ही बरसात का क्रम जारी रहा। इसके बावजूद भी नागरिक सड़कों पर दिखे, लगभग सभी दुकानें बंद रहीं, केवल वही लोग जिनके घर में आने जाने का मार्ग दुकानों से होकर जाता है उन्हीं की शटरें आधी अधूरी खुली रहीं। नगर वासियों ने झंडाचौक पर एकजुट होकर एक आमसभा आयोजित की। जिसमें बताया गया कि उनका विरोध किसी जाति विशेष से से नहीं होकर एक्ट में किए गए संशोधन से है। जिसके दूरगामी दुष्परिणाम सभी को भुगतने पड़ सकते हैं। इसे लेकर सभी एकजुट होकर देशहित में गैर राजनीतिक आंदोलन करने को विवश हुए हैं। आमसभा के उपरांत ज्ञापन का वाचन कर राष्ट्रपति के नाम का ज्ञापन झंडाचौक पर तहसीलदार रश्मि चतुर्वेदी को सौंपा गया। जिसमें उल्लेख किया गया है कि हम सभी अनारक्षित पिछड़ा वर्ग के सदस्य गाडरवारा जिला नरसिंहपुर मप्र के निवासी छह सितंबर को निवेदन करते हैं कि अनुसूचित जाति और जनजाति अत्याचार अधिनियम का पूर्व में जो कठोर स्वरूप था। उसे सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति द्वारा परिभाषित कर ऐसे प्रावधान निर्मित किए थे। जिससे इस अधिनियम का दुरूपयोग रोका जा सके एवं एक समतामूलक समाज की स्थापना हो सके। लेकिन प्रधानमंत्री द्वारा लोकसभा में विधि विधान के विपरीत एवं सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्देशित सिद्धांतों के विपरीत एक अध्यादेश लाकर अधिनियम को अत्यधिक कठोर रूप से परिभाषित कर कानून के रूप में पारित किया गया है तथा उक्त अधिनियम में किसी भी घटना की रिपोर्ट होने पर बिना जांच के अनावेदक की गिरफ्तारी के अधिकार पुलिस को दिए गए हैं। अनावेदक पक्ष को प्राप्त होने वाली अग्रिम जमानत के प्रावधान को समाप्त किया गया है। उक्त तथ्य से छह सितंबर 2018 में जातिगत सामाजिक संगठनों ने गाडरवारा नगर को बंद करने का आवाहन किया। साथ ही आपसे प्रार्थना है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णय के अनुरूप ही अनुसूचित जाति और जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम को संशोधित किया जाए तथा अग्रिम जमानत का अधिकार प्राप्त हो तथा उक्ताशय के संशोधन नए अध्यादेश में समाहित किए जाएं। उपरोक्त के अभाव में मजबूरन सामान्य एवं अन्य पिछड़ा वर्ग को आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा। ज्ञापन में सर्व ब्राह्मण महासभा, राजपूत क्षत्रिय महासभा, कौरव महासभा, गहोई समाज, अग्रवाल समाज, किरार समाज, विश्नोई समाज, गुर्जर समाज, सोनी समाज, जैन समाज, सेन जागृति संघ, विश्वकर्मा समाज, साहू समाज, माहेश्वरी समाज, नेमा समाज, रजक समाज, सिंधी समाज, चौरसिया समाज, कुम्हार समाज, कायस्थ समाज, राय कलार समाज, रघुवंशी समाज, यादव समाज, कुर्मी समाज, सिख समाज, छीपा समाज, लोधी समाज, रैकवार नोरिया समाज, कोष्टी समाज, सैनी समाज, पटवा समाज एवं संबंधित सभी सामान्य एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन दिया गया वहीं सभी के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।...

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