[mau] - घाघरा का जलस्तर स्थिर, बीबीपुर गांव में तीन बिस्वा उपजाऊं भूमि नदी में विलीन

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घाघरा का जलस्तर इधर बीच स्थिर है। लेकिन तटवर्ती इलाकों के लोगों की नींद उड़ी हुई है। घाघरा की जद में कुसुम्हा क्षेत्र के बीबीपुर गांव में रोशन यादव की तीन बिस्वा गन्ने की फसल घाघरा में विलीन हो गई। लहरें नदी के किनारों से टकरा रहीं। सरासो गांव पानी से घिर गया है। नदी बुधवार को खतरे के निशान से 50 सेमी ऊपर बह रही है।

नदी का जलस्तर स्थिर रहने के बाद भी कटान तेज होने से तटवर्ती इलाके के लोगों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है। अपनी विलीन हो रही उपजाऊ जमीन को लोग दूर से ही निहार रहे हैं। नदी का दबाव भारत माता मंदिर, शवदाह घाट, सरस्वती मंदिर, खाकी बाबा की कुटी, जानकी घाट, दुर्गा मंदिर तथा डीह बाबा मंदिर पर बढ़ गया है। उधर घाघरा की तटवर्ती इलाके धनौली रामपुर, नई बाजार, नवली, बहादुरपुर, पतनई, सरया, गोधनी, बीबीपुर, ताहिरपुर, सरासो, जमीराचौराडीह, बेलौली, कोरौली, पाऊस, ठिकरहिया, महुआबारी, रसुलपुर, सूरजपुर सहित दर्जनों गांवों की हजारो एकड़ फसल पानी में डूबी हुई है। करीब बीस दिनों से घाघरा खतरा निशान से ऊपर बह रही। लेकिन अभी भी कटान से बचाव के उपाय न न किए जाने से लोग आक्रोशित हैं। फसलों के पानी मे डूबने से किसानों के सामने पशुओं के लिए चारे की समस्या उत्पन्न हो गई है। उधर सरासो गांव पानी से चारों तरफ से घिर गया है। जिससे लोगो को आने जाने में खासी दिक्कतें हो रहीं। बुधवार को गौरीशंकर घाट पर घाघरा का जलस्तर 70.40 मीटर रहा। इस तरफ नदी खतरा बिंदु 69.90 मीटर से 50 सेमी ऊपर बह रही है। गांव में कटान तेज होने से ग्रामीण को अनिष्ट की आशंका से बेचैन हैं।...

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