[ratlam] - 9 साल से 3 छात्रावास अधूरे, खंडहर में हो रहे तब्दील, ठेकेदार को 80 % भुगतान

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रतलाम. शासन की योजनाओं को किस प्रकार चूना लगाकर आमजन के हित से दूर किया जा रहा है, इसकी बानगी रतलाम जिले के ग्रामीण क्षेत्र में आदिवासी विकास विभाग द्वारा देखने को मिल रही है। 60 लाख की लागत से तीन छात्रावास के लिए वर्ष 2009 में बजट स्वीकृत हुआ था। विभाग ने कार्य पूर्ण नहीं होने के बाद भी 80 फीसदी बजट पास कर दिया है। वहीं अधूरे निर्माण के चलते यह भवन 9 साल बाद अब खंडर बन चुके है। जहां पर स्कूली छात्र तो नहीं है, लेकिन पक्षियों का डेरा बना है।

भारतीय ट्राइवल पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता ध्यानवीर डामोर ने बताया कि आदिवासी क्षेत्र में छोटे-छोटे मजरे और गांव है। जहां से हाईस्कूल काफी दूर होते है। प्रत्येक मजरों में स्कूल खोलना भी संभव नहीं है। इसके चलते आदिवासी छात्र व छात्राएं अपनी पढ़ाई करने तहसील व कस्बे में आते हैं। जहां पर हाईस्कूल की सुविधा होती है। यह सभी काफी गरीब परिवार के होते है। जिनका परिवार दो वक्त की रोटी भी काफी मुश्किल से कमा पाता है। एेसे में बाहर रहकर बच्चों को पढ़ाना इनके बूते नहीं है। इसीलिए शासन ने जहां पर शासकीय हाईस्कूल की सुविधा वहां पर शासकीय छात्रावास खोलकर बच्चों को शिक्षा से जोडऩे का कदम उठाया है। इस कड़ी में वर्ष 2009 में ग्राम सेलेजदेवदा और सैलाना के सकरावदा गांव में 60-60 रुपए की लागत से प्री. मैट्रिक बालक छात्रावास और रावटी में कन्या आश्रम बनाने के लिए बजट आवंटित किया था। निर्माण कार्य आदिवासी विकास विभाग की देखरेख में होना था। वह छात्रावास अधूरे कार्य के साथ सालों से पूर्ण निर्माण के इंतजार की राह देख रहें हैं।...

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