[rewa] - गजब के लोकगीतों की इस कवि ने की रचना, समाज व संस्कृति के होते हैं दर्शन, हर कोई करता है बखान, जाने यह कौन है

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रीवा। बघेलखंड का समाज यहां के कवियों के लोकगीतों में व्याप्त है। लोकगीतों बघेलखंड के साथ समूचे भारत वर्ष का चित्र शामिल मालूम होता है। उक्त विचार जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय चित्रकूट के पूर्व आचार्य व कुलसचिव प्रो. आर्या प्रसाद त्रिपाठी ने व्यक्त किया। प्रो. त्रिपाठी मंगलवार को अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में आयोजित डॉ. भगवती प्रसाद शुक्ल भाषणमाला में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे।

मुख्य अतिथि प्रो. त्रिपाठी ने कई लोकगीतों का दिया उदाहरण

विश्वविद्यालय के पं. शंभूनाथ शुक्ल सभागार में आयोजित भाषणमाला में प्रो. त्रिपाठी ने बघेलखंड से व्याप्त कई लोकगीतों का उदाहरण भी दिया। उन्होंने डॉ भगवती प्रसाद शुक्ल को याद करते हुए कहा कि डॉ. भगवती प्रसाद अनोखे व्यक्तित्व के धनी रहे। उनके द्वारा रचित बघेली साहित्य अद्भुत रहा है। विशेष बात यह रही कि उन्होंने आदिवासियों की बीच जाकर लोकगीत संग्रहीत किया। प्रो. आर्या प्रसाद त्रिपाठी ने डॉ. शुक्ल को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया।...

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