[sirmour] - भारतीय संस्कृति में गुरू का स्थान सर्वोपरि: डॉ. बिंदल

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उत्कृष्ट सेवाओं पर 21 अध्यापक सम्मानित

शिक्षक दिवस पर अरिहंत इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित समारोह में विस अध्यक्ष ने की शिरकत

भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोपरि : डॉ. बिंदल

नाहन (सिरमौर)। भारतीय संस्कृति मे गुरु का स्थान सर्वोपरि है। बदलते परिवेश में गुरु-शिष्य परंपरा आज भी कायम है। शिक्षकों को भी इस परंपरा का निर्वहन कर्तव्यनिष्ठा व नि:स्वार्थ भाव से करना चाहिए। शिक्षक दिवस पर अरिहंत इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित समारोह में विस अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने शिरकत की।

उन्होंने कहा कि महान शिक्षाविद, दार्शनिक, विचारक और महान वक्ता स्व. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का शिक्षा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान रहा है। डॉ. राधाकृष्णन का मानना था कि यदि सही परिप्रेक्ष्य में बच्चों को शिक्षा देकर सुसंस्कारित बनाया जाए तो समाज में फैली अनेक सामाजिक बुराइयां स्वयं ही खत्म हो जाएंगी। उन्होंने द्रोणाचार्य और एकलव्य का उदाहरण देते हुए कहा कि एकलव्य ने गुरु दक्षिणा में किस प्रकार अपने आपको गुरु के समक्ष समर्पित किया था। अतीत में भारत को विश्व गुरु की संज्ञा दी गई थी और हम सभी को इस परंपरा के पुनर्स्थापन के लिए भारत की संस्कृति और सभ्यता का संरक्षण करना होगा। इस अवसर पर उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान करने वाले 21 अध्यापकों को सम्मानित किया। इस मौके पर अरिहंत स्कूल का स्टाफ समेत विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।...

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