[udaipur] - रोग से बड़ा झोली में अस्पताल पहुंचने का दर्द

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गौतम पटेल . सराड़ा . देश डिजिटल इंडिया बन रहा है, लेकिन उदयपुर जिले के आदिवासी क्षेत्र आज भी सड़क, बिजली, पानी की समस्याओं से जूझ रहे हैं। हालात इतने बदतर हैं कि जंगल में बसे गांवों से मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए 5 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है। बिमारों, प्रसूताओं को झोली में डालकर अस्पताल पहुंचाया जाता है। अभी तक मुख्य सड़क से आबादी तक सड़क निर्माण में वन विभाग का रोड़ा रहा। सरकारों ने वादे किए, लेकिन हालात में सुधार लाने में किसी ने पहल नहीं की।

ये हालात हैं सराड़ा उपखण्ड के नठारा ग्राम पंचायत के झालरदेवी और खोड़ी महुड़ी गांव के। इन गांवों की आबादी करीब एक हजार है, लेकिन यहां के लोग सुविधाओं के अभाव में आदिमानव जैसा जीवन जीने को मजबूर हैं। किसी के अस्वस्थ होने, प्रसूताओं को अस्पताल पहुंचाने पर पूरा परिवार जुट जाता है। पीडि़त को झोली में डालकर पांच किलोमीटर उबड़-खाबड़ रास्तों से ले जाया जाता है। प्रसव पीड़ा अधिक होने और जहरीले जीव के काटने पर जान बच पाना ही मुश्किल हो जाता है।...

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