[bageshwar] - छोटी मोटी जांच के लिए बागेश्वर जाना बना लोगों की मजबूरी

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राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय खंतोली में सैंपलों जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। लोगों को मल, मूत्र, खून आदि सैंपलों की जांच के लिए 35 किलोमीटर दूर बागेश्वर गांव आना पड़ता है। इस अस्पताल में एक्सरे व अल्ट्रासाउंड की भी कोई सुविधा नहीं है। अस्पताल में आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट तो तैनात है लेकिन आयुर्वेदिक डॉक्टर का पद पांच साल से रिक्त हैं।

बृहस्पतिवार को सुबह अमर उजाला की टीम यहां पड़ताल के लिए पहुंची तो कई समस्याएं सामने आई। सबसे पहले 8: 40 बजे वार्ड ब्वाय अस्पताल में पहुंचे। इसके बाद 8: 45 बजे फामासिस्ट गिरीश वर्मा, 8:50 पर डॉ. डिंपल भाकुनी और आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट नेहा राणा 8 : 56 बजे अस्पता पहुंची। सवा नौ से रोगियों का आना शुरू हुआ। अस्पताल में एक्सरे और अल्ट्रासाउंड कराने और जांच की सुविधा न होने से उपचार के लिए पहुंचे मरीज काफी परेशान आए। लोगों ने बताया कि मरीजों को एक्सरे व अल्ट्रासाउंड कराने, विभिन्न सैंपलों की जांच के लिए बागेश्वर जाना पड़ता है। जिसमें उनका पूरा दिन के साथ-साथ काफी रुपया बर्बाद हो जाता है। इस अस्पताल की स्थापना वर्ष 2004 में हो गई थी। खंतोली गांव के साथ ही पोखरी, कभाटा, खोलागांव, विजयपुर, ढपटी, शेरी और आगर गांव के ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधा के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर हैं।...

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