[bareilly] - राशन घोटालाः मृतकों के नाम बांटा जा रहा था राशन

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बरेली। जिंदा लोगों को भले ही पीडीएस का सस्ता राशन न मिल पा रहा हो लेकिन अनाज की कालाबाजारी के लिए बड़ी तादाद में मृतकों के नाम सस्ता राशन बांटा जा रहा है। रिठौरा राशन घोटाले की जांच में एक के बाद एक उधड़ती परतों से ये गड़बड़ी भी सामने आई है। आंवला तहसील की करीब तीन सौ कोटे की दुकानों पर राशन कार्डों की जांच भी शुरू हो गई है। इसी तरह दूसरी तहसीलों में भी फर्जी राशन कार्ड बनाने के खेल की जांच शुरू कर दी गई है।

कोटे की दुकानों के जरिये करीब 22 लाख लोगों को हर माह सस्ता राशन दिया जाता है, लेकिन गरीबों के इस राशन पर भी माफियाओं की काली नजर है। सरकारी मशीनरी से जुड़े भ्रष्ट लोग, कुछ कोटेदार और राशन माफिया ये तीनों मिलकर हर माह हजारों क्विंटल सरकारी अनाज को फर्जी राशन कार्डों के माध्यम से ठिकाने लगाते आ रहे हैं। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिला प्रशासन ने अप्रैल से अब तक सभी 15 ब्लाकों में राशन कार्डों की नए सिरे से जांच कराई है तो 3294 ऐसे मामले पकड़ में आए हैं, इसमें जिन लोगों के कार्ड पर राशन बांटा जा रहा था, वे लोग या तो मृतक हैं या फिर वह वहां रहते ही नहीं है। जबकि कोटेदारों ने ऐसे राशन कार्डों पर हर माह राशन वितरण होना दिखाया है। यह घोटाला भले ही पकड़ में आ गया हो लेकिन कार्रवाई के नाम पर इन लोगों के केवल राशन कार्ड ही निरस्त हुए हैं। जबकि किसी कोटेदार या अवैध तरीके से राशन लेने वालों से वसूली न करके अफसरों ने मामला दबा दिया है। सूत्र बताते हैं कि अभी भी कोटे की दुकानों पर हजारों की संख्या में फर्जी राशन कार्ड है। ग्रामीण इलाकों की कोटे की दुकानों पर अब तक बायोमेट्रिक मशीन न होने से कार्डधारकों के फर्जी दस्तखत और अंगूठे से भी राशन की कालाबाजारी भी बड़े पैमाने पर हो रही है।...

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