[bhadohi] - ईयर इंडर शिक्षा

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ज्ञानपुर। गुजरता वर्ष 2018 शिक्षा को लेकर मिले-जुले अनुभवों वाला रहा। प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी बनी रही। मॉडल स्कूलों के संचालन से गरीब बच्चों को बेहतर तालीम की दिशा में पहल की गई। डिग्री कॉलेज में बीएससी एग्रीकल्चर का पाठ्यक्रम जुड़ने के साथ ही इस वर्ष शिक्षा के विस्तार की उम्मीद बढ़ी हैं।

केएनपीजी कॉलेज में बीएससी एजी के संचालन के लिए पद सृजन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया। 2019 से दो बैच में कक्षा संचालन की उम्मीद बढ़ गई है। जिले में 1143 प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय हैं। इनमें एक लाख 49 हजार बच्चे नामांकित हैं। पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार करीब 15 हजार बच्चे बढ़े हैं। 2018 में 1234 ड्राप आउट बच्चों को नजदीक के स्कूलों में एडमिशन कराया गया। आरटीई के मुताबिक जिले के 1143 परिषदीय विद्यालयों में 4300 शिक्षक होने चाहिए, जबकि 3400 शिक्षक ही पढ़ा रहे हैं। 125 से अधिक स्कूल एक या दो शिक्षकों के सहारे चल रहे हैं। सत्र में 15 स्कूलों की मान्यता के मामले लंबित हैं। माध्यमिक शिक्षा में 35 राजकीय, 25 वित्तपोषित समेत कुल 185 विद्यालय हैं, जिनमें राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी बनी रही। 33 राजकीय हाईस्कूल पांच साल से दो शिक्षकों के सहारे संचालित हो रहे हैं। यह स्थिति इस वर्ष भी रही। जबकि प्रधानाचार्य समेत आठ शिक्षकों की जरूरत प्रत्येक स्कूल में है। ज्ञानपुर के वीएनजीआईसी में 65 शिक्षकों की जरूरत के मुकाबले केवल 35 शिक्षक ही हैं। माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में दो मॉडल स्कूलों का संचालन सुखद अनुभव देने वाला रहा। सेवानिवृत्त शिक्षकों का चयनकर सीखापुर और गिर्दबड़गांव के मॉडल स्कूल संचालित कर दिए गए। काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय समेत जिले में 24 महाविद्यालय हैं। सब कुछ ठीक ठाक रहा तो 2019 से केएनपीजी में बीएससी एजी की कक्षाएं चलने लगेंगी। वेदपुर में साढ़े छह करोड़ की लागत से भवन बनकर तैयार हो चुका है। महाविद्यालय प्रशासन की तरफ से पद सृजन के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।...

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