[haridwar] - अखाड़ों के साथ ही स्नान कर पाएंगे महिला माईबाडे

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हरिद्वार। लंबे समय से महिला संत यह प्रयास करती आ रही हैं कि उन्हें एक अलग अखाड़े के रूप में मान्यता मिल जाए। अखाड़ा परिषद ने कई बार इसे अमान्य कर दिया है। फलस्वरूप कुंभ मेलों में महिला संतों के दंडीबाड़े और माईबाड़े अलग से शाही जुलूस निकालकर कुंभ स्नान नहीं कर पा रहे हैं। आगामी प्रयाग अर्द्धकुंभ और हरिद्वार कुंभ में महिला नागाओं का स्नान अखाड़ों के संतों के साथ ही होगा। पूर्ण महिला अखाड़े को कोई मान्यता संत जगत से नहीं मिल पाई है।

लंबे अरसे से महिला संत अपनी अलग पहचान के लिए छटपटा रही हैं। पिछले हरिद्वार कुंभ में महिला संतों ने एक महिला महामंडलेश्वर मां ज्योतिषानंद को अमेरिका से लाकर पुरुष शंकराचार्यों के समकक्ष महिला पार्वत्याचार्य बनाने को पट्टाभिषेक समारोह आयोजित किया था। निरंजनी अखाड़े की मां योगशक्ति के संयोजन में आयोजित उस पूरा समारोह को नागा संन्यासियों ने उखाड़ फेंका था। महिला माईबाडे़ की प्रखर संत त्रिकाल भवंता पिछले चार कुंभ मेलों से महिला संतों का अलग अखाड़ा बनाने के लिए प्रयत्न करती रही हैं। प्रयाग, उज्जैन और नासिक तीनों कुंभ मेलों में अखाड़ा परिषद ने उनके प्रयास को विफल कर दिया। हालात यहां तक बदतर हुए कि त्रिकाल भवंता को कुंभ नगर छोड़कर भागना पड़ा। हाल ही में ज्योर्तिपीठ का शंकराचार्य पद पाने में असफल रही संन्यासियों के जूना अखाड़े की महामंडलेश्वर हेमानंद गिरि ने काशी विद्वत परिषद और धर्म महामंडल को धता बताते हुए नेपाल जाकर स्वयं को पशुपतेश्वर पीठ का शंकराचार्य घोषित कर दिया। षड़दर्शन साधु समाज और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने उनके पद और पीठ को अमान्य कर दिया है। इस प्रकार खुद की पहचान बनाने में महिला संतों के सभी मंसूबे लगातार फेल होते आए हैं।...

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