[haridwar] - भेल में वन्यजीवों के कदमों को थामलेगी लैमन घास

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हरिद्वार। भेल उपनगरी में हाथियों सहित अन्य जंगली जानवरों की आवाजाही रोकने के लिए वन विभाग अब लेमन ग्रास का सहारा लेगा। हरिद्वार वन प्रभाग के जंगल से भेल के केशव कुंज के छह हेक्टेयर भूमि पर लेमन ग्रास लगाई जाएगी। इस प्रस्ताव मुख्यालय भेज दिया गया है।

भोजन की तलाश में जंगली हाथी राजाजी टाइगर रिजर्व के जंगलों से भेल का रुख करते हैं। आसपास के जंगलों की अपेक्षा यहां हाथियों को खाने के केले के पेड़ और पीठ बाजार में पड़ी बेकार सब्जी और फल मिल जाते हैं। कई बार टस्कर हाथी भी जंगल से यहां घुस आता है। जिससे अनहोनी की आशंका बनी रहती है। अभी तक टस्कर हाथी भेल के अंदर ही कई लोगों को पटककर मार चुका है। राजाजी टाइगर रिजर्व और वन विभाग के अधिकारियों की लाख कोशिश के बाद भी हाथियों की आवाजाही नहीं थम रही है। इसलिए इस समस्या से निजात पाने के लिए जंगल से भेल के लिए प्रवेश करने वाले इलाकों में लेमन ग्रास लगाने की योजना बनाई गई है। मालूम हो कि लेमन को हाथी और अन्य जंगली जानवर पसंद नहीं करते। सीमा के काफी अंदर तक लेमन ग्रास उगने के बाद हाथी यहां आना पसंद नहीं करेंगे। ऐसे में वन विभाग को उम्मीद है कि हाथियों की आवाजाही पर रोक लग सकेगी। मैटिरियल गेट और केशव कुंज के समीप से ही हाथी भेल में प्रवेश करते हैं। रेंजर निदेश नौडियाल ने बताया कि डीएफओ आकाश वर्मा की ओर से सभी के साथ वार्ता कर योजना को तैयार किया गया है। जिसे मुख्यालय भेज दिया गया है। स्वीकृति के बाद ही योजना को अमल में लाया जाएगा। उन्होंने बताया कि लेमन घास की गंध हाथियों और अन्य वन्यजीवों को भगाने में प्राकृतिक फेंसिंग का कार्य करती है। इसकी सुगंध से हाथी और अन्य वन्यजीव भेल उपनगरी का रुख नहीं करेंगे।...

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