[pratapgarh] - दूसरे गुरुवार को छोटी बिटियन मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब

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दूसरे गुरुवार को छोटी बिटियन मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब

झूले, सर्कस के साथ ही लगी भारी संख्या में दुकानें

कुंडा। दूसरे गुरुवार को छोटी बिटियन का मेला लगा। इसमें भारी संख्या में महिलाएं और पुरुष शामिल हुए। छोटी बिटियन की समाधि पर फूल और चादर चढाई गई। महिलाओं ने तिल चौरी चढ़ाई। इसके साथ ही दुरदुरैया का भी मजमा लगा रहा।

मानिकपुर के चौकापारपुर में दूसरे गुरुवार को भारी संख्या में लोग छोटी बिटियन के मेले में पहुंचे। इसमें ज्यादा संख्या महिलाओं की रही। प्राचीन मान्यता के अनुसार अपनी अस्मिता बचाने के लिए राजा, उनकी पत्नी और पुत्री की समाधि यहां पर बनी थी। यहां बनी तीन कब्रों पर महिलाएं तिल और चावल चढ़ाकर अपनी मन्नतें मांगती हैं। इसके साथ ही मेले में खरीदारी भी होती है। महिलाएं मेले में ही दुरदुरैया का प्रोग्राम करती हैं। पहले गुुरुवार केा मन्नतें मांगी जाती है तो दूसरे गुरुवार केा छोटी बिटियन का मेला माना जाता है। इस दिन मन्नतें पूरी होने के चलते दुरदुरैया का भारी प्रोग्राम होता है। इसमें महिलाएं भारी संख्या में एक साथ बैठकर लाई गुड़ चना का सेवन करती हैं। मलिक बिटियन का उल्लेख 1920 के गजेटियर में भी मिलता है। मेले में लकड़ी के सामानों की खरीददारी भी होती है। इसके अलावा गन्ने को भी प्रसाद के रूप में लोग खरीदकर ले जाते हैं। मेले में प्रतापगढ़ के अलावा रायबरेली, अमेठी, कौशांबी आदि जिलों के लोग पहुंचते हैं। भीड़ अधिक होने के कारण मेले को दो भागों में बांटा गया है। पहले गुरुवार को बड़ी मलिक बिटियन का मेला लगता है। दूसरे गुरुवार को छोटी मलिक बिटियन का मेला लगता है।...

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