[jharkhand] - ये हैं झारखंड की 4 मलाला जिन्होंने पढ़ाई के लिए की लड़ाई

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बोकारो (झाऱखंढ)। आज मलाला डे है। पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा के खिलाफ तालिबान की हिंसा के विरोध में आवाज उठाने वाली मलाला यूसुफजई का जन्मदिन भी। मलाला जैसी ही कुछ लड़कियां झारखंड में भी हैं। इन लड़कियों ने भी विषम परिस्थितियों का सामना करके अपनी पढ़ाई जारी रखी है। पढ़िए भास्कर टीम की रिपोर्ट...

  1. धनबाद की सपना मल्लिक

बहनों को बेचना चाहते थे पिता, पर हार नहीं मानी

धनबाद: सपना 9 साल की थी, तभी उसकी मां बसंती देवी चल बसी। वह पढ़ना चाहती थी लेकिन शराबी पिता मिहिल मल्लिक बेटियों से छुटकारा चाहते थे। उन्हें बाजार में बेचने की धमकी देते थे। बेटियों को बेचने के लिए उन्हें लेकर निरसा भी गए, लेकिन तभी सपना के नाना-नानी मताल मल्लिक और जामी देवी आगे आए। उन्होंने सपना के पिता को कहा कि वह बच्चों की चिंता छोड़ दे। उन्हें वापस धनबाद ले आए। लेकिन सपना ने तभी से अपने छोटे भाई-बहनों का ख्याल रखना शुरू कर दिया। उन्हें रोज तैयार करके स्कूल भेजती थी।...

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