[nagaur] - जर्जर कुणी का स्कूल भवन

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चौसला. सरकार व शिक्षा विभाग एक और जहां सरकारी विद्यालय में नामांकन बढ़ाने, बच्चों को विद्यालय से जोडऩे, अच्छे शिक्षा प्रदान करने के लिए कई प्रकार के कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के लगभग सभी सरकरी स्कूल सुविधाओं के लिए तरस रहे है। कहीं पर्याप्त भवन नहीं है तो कहीं शिक्षकों का अभाव है। ऐसी ही बुनियादी सुनिधाओं के लिए तरस रहा है चौसला ग्राम पंचायत के कुणी गांव का राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय। शिक्षा विभाग व जनप्रतिनियों की अनदेखी का आलम यह है कि गत वर्ष इन दिनों तेज बारिश में प्रधानाध्यापक कक्ष की करीब 17 पट्टियां रात्रि के समय टूटकर नीचे गिर गई थी। स्कूल स्टाफ व ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों व शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अनेकों बार अवगत कराने के बावजूद भी स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है। यहां मौजूद स्कूल स्टाफ ने बताया कि गत वर्ष अचानक पट्टियां टूटने से स्टाफ एवं बच्चों की दहशत दिल और दिमाग से अभी निकल भी नहीं पाई थी कि बुधवार शाम झमाझम हुई बारिश से दूसरे कमरे की दो पट्टियों में दरार आ गई। हादसे के डर से शिक्षकों ने दोनों कमरों पर ताला लगा दिया।1953 की है स्थापना- जानकारी के अनुसार राज्य सरकार ने कुणी स्थित छत्तरी वाले बालाजी मंदिर के पास वर्ष 1953 में प्राथमिक विद्यालय खोला था। इसके 38 साल के इंतजार के बाद शिक्षा विभाग ने इसे 1991 में उच्च प्राथमिक स्तर पर क्रमोन्नत किया गया। यहां कक्षा 1 से 8 तक वर्तमान में 76 विद्यार्थियों का नामांकन है, लेकिन कक्षा-कक्षों की कमी है। ऐसे में बरामदे में चार कक्षा चलाई जा रही है, वहीं बाकि कमरों की छत से बारिश का पानी टपकता है।यह कक्षा-कक्षों की स्थिति- विद्यालय में 7 कक्ष है। इनमें से एक में पोषाहार कक्ष, दूसरे में भण्डार व पुस्तकालय कक्ष और तीसरा कक्ष स्टाफ के लिए है। रहे चार कमरे जिसमें दो कमरे क्षतिग्रस्त हो जाने से ताला लगा रखा है। 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए सिर्फ दो कक्षा-कक्ष उपलब्ध है। ऐसे में चार कक्षाओं को दो कमरों में और चार को बरामदे में अध्ययन करवाने की मजबूरी बनी हुई है।...

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