[sawai-madhopur] - हमारी सीमा का जज्बा भी कुछ कम नहीं

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सवाईमाधोपुर. आज मलाला दिवस है। शिक्षा के लिए सीने पर गोली खाने वाली नोबल पुरस्कार विजेता पाकिस्तान की एजुकेशन एक्टिविस्ट मलाला यूसुफजई को तो सभी जानते है। उनके शिक्षा के लिए संघर्ष से भी सब परिचित है, लेकिन हमारे जिले में भी ऐसी बालिकाएं हैं जिन्होंने शिक्षा के लिए कड़े विरोध का सामना किया है। फिर चाहे वह विरोध घर परिवार का हो या फिर समाज का।

ये बालिकाएं शिक्षा के लिए हर विरोध व परेशानी के सामने डटकर खड़ी रही। कुछ इस प्रकार की ही कहानी है जिले के रावंल गांव निवासी सीमा मीणा की। सीमा बचपन से ही पढ़ाई में तेज थी। कक्षा में हमेशा अव्वल रहती थी, लेकिन करीब दो साल पूर्व सीमा के पिता ने सीमा की मर्जी के बिना ही उसकी शादी तय कर दी। सीमा ने शादी से इनकार कर दिया और आगे पढ़ाई की इच्छा जताई।...

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