👉 मायावती व अखिलेश शासन की भर्तियां🕵️ कटघरे में, पद नहीं होते हुए भी किया गया चयन 👨‍🎓

  |   Uttar-Pradeshnews / Lucknownews

उत्तरप्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने अखिलेश यादव व मायावती के मुख्यमंत्रि रहने के दौरान हुई भर्तियों में गड़बडिय़ों का खुलासा किया है। इस दौरान वर्ष 2011, 2013 व 2016 में प्रवक्ता व स्नातक शिक्षक (टीजीटी-पीजीटी) के ऐसे विषयों के लिए चयन प्रक्रिया शुरू की गई, जो विषय प्रदेश के माध्यमिक काॅलेजों में थे ही नहीं। इस मामले जांच चयन बोर्ड की ओर से गठित समिति करेगी।

जानकारी के अनुसार वर्ष 2013 के जीव विज्ञान स्नातक शिक्षक के पद पर 187 अभ्यर्थियों का चयन करके काॅलेजों में भेजा गया। अधिकांश ने बिना पद के ही ज्वाइन भी कर लिया है। इसी विषय में 2011 के 65 पदों की लिखित परीक्षा का रिजल्ट जारी होना है। प्रवक्ता वनस्पति विज्ञान के पदों पर चयन प्रक्रिया चल रही है, इसके लिए विधिक राय मांगी जा रही है। वहीं चयन बोर्ड ने 2016 में टीजीटी-पीजीटी के पांच नए विषयों का विज्ञापन निकालकर आवेदन लिए जो काॅलेजों में नहीं है।

चयन बोर्ड के सचिव दिव्यकांत शुक्ल व उप सचिव नवल किशोर ने सख्त कदम उठाते हुए 2016 में टीजीटी-पीजीटी के आठ विषयों का विज्ञापन निरस्त कर दिया है। इनमें टीजीटी के छह विषयों में 318 व पीजीटी के दो विषयों के तीन पद हैं। इन 321 पदों के लिए प्रदेश भर के 69 हजार 297 अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन आवेदन किया था। अब वह अधर में अटक गए हैं।

सचिव ने बताया कि टीजीटी के विषय यूपी बोर्ड के हाईस्कूल के व पीजीटी के विषय इंटरमीडिएट के पाठ्यक्रम में शामिल नहीं है। ऐसे में इन विषयों के पदों पर चयन कैसे किया जा सकता है। टीजीटी जीव विज्ञान व पीजीटी वनस्पति विज्ञान विषय के घोषित पदों के लिए चयन 2011 व 2013 में भी हुआ है या चयन प्रक्रिया चल रही है। लेकिन, 2016 में पांच नए विषयों का विज्ञापन जारी करके आवेदन लिए गए, जबकि ये विषय माध्यमिक काॅलेजों में नहीं है। इसीलिए आठ विषय के पदों को निरस्त करने का निर्णय किया गया है।

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