[jabalpur] - इस शहर में रोज होता है मौत से खिलवाड़, देखकर भी प्रशासन अनजान

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जबलपुर। शहर समेत ग्रामीण क्षेत्रों में लोडिंग वाहनों में बेरोकटोक सवारियां ढोई जा रही हैं। लोडिंग वाहनों का सबसे अधिक उपयोग मजदूरों को लाने-ले जाने में किया जा रहा है। आए दिन हो रहे हादसों के बाद भी न तो सम्बंधित थाना प्रभारियों पर कार्रवाई हो रही है न ही आरटीओ विभाग की नींद टूट रही है। आलम यह है कि शहर में भी लोडिंग वाहनों का उपयोग सवारी वाहन के रूप में हो रहा है।

चरगवां में हुए दो हादसों के बाद जारी हुए थे निर्देश

वर्ष 2017 में चरगवां में हुए दो हादसों के बाद सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में लोडिंग वाहनों में यात्री परिवहन रोकने के निर्देश जारी हुए थे। शहर में ट्रैफिक पुलिस और ग्रामीण क्षेत्रों में सम्बंधित थाना प्रभारियों की जवाबदारी सुनिश्चित की गई थी। तय हुआ था, जिस थाना क्षेत्र में लोडिंग वाहन में यात्री परिवहन मिला और हादसा हुआ तो वहां के थाना प्रभारी पर कार्रवाई होगी। निगरानी के लिए सम्बंधित तहसीलदार और एसडीएम को भी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन के लिए लोडिंग वाहन ही एकमात्र विकल्प हैं। ग्रामीणों को मजबूरन लोडिंग जीप में सफर करना पड़ता है। एक जीप में 30-35 लोग सवार हो जाते हैं। चरगवां, शहपुरा, बेलखेड़ा और पाटन में कृषि मजदूरों को लाने-ले जाने के लिए मिनी ट्रकों का उपयोग किया जाता है। दिन भर खेतों में काम करने के बाद शाम को भी इन्हीं वाहनों से उन्हें वापस छोड़ा जाता है। ...

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