[jaipur] - कोर्ट तो 153 चाहिए और आप 11 ही खोल रहे हो

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हाईकोर्ट ने पॉक्सो से जुडे़ मामलों के लिए कोर्ट खोलने में ढिलाई पर नाराजगी जाहिर की है, वहीं इस मामले में अड़चनों को दूर करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर सहयोग देने की पहल की है। कोर्ट ने कहा कि दुष्कर्म के अपराधियों को सजा देने के लिए 153 कोर्ट की जरुरत है और सरकार 11 कोर्ट ही खोल रही है। पर्याप्त संख्या में कोर्ट खोली जाएं और कोर्ट का मतलब एक कमरे का निर्माण नहीं है, बल्कि पॉक्सो अधिनियम के तहत निर्धारित परिसर होना चाहिए।

कोर्ट ने आज सायं साढ़े चार बजे मुख्य सचिव डी बी गुप्ता सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को हाईकोर्ट बुलाया है। इस दौरान न्यायाधीश मनीष भण्डारी हाईकोर्ट की कमेटी के प्रभारी के नाते अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। वे यह जानने का प्रयास करेंगे कि दुष्कर्म के मामलों के लिए नई कोर्ट खोलने में क्या अड़चन आ रही है और उनका किस तरह समाधान हो सकता है। न्यायाधीश मनीष भण्डारी व न्यायाधीश दिनेश चन्द्र सोमानी की खण्डपीठ ने कल राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान सरकार की ओर से मुख्य सचिव डी बी गुप्ता, वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मुकेश शर्मा, प्रमुख विधि सचिव महावीर शर्मा तथा सामाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, वहीं विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से सदस्य सचिव और वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी एस के जैन ने कोर्ट को मामले की गंभीरता से अवगत कराया। सरकार की ओर से कहा गया कि नई पॉक्सो कोर्ट खोलने के लिए हाईकोर्ट से बजट के बारे में जानकारी मांगी गई है, इस पर विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव जैन ने कहा कि जब एक पॉक्सो कोर्ट पहले से खुली हुई है तो बजट पता करने की आवश्यकता ही कहां रह गई है। इस पर कोर्ट ने कहा कि बजट तो कोर्ट बता देगा।...

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