[neemuch] - अंतिम संस्कार की प्रक्रिया से परे होकर किया देहदान

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नीमच. पुरूष प्रधान समाज में महिलाओं को जिस दृष्टिकोण से देखा जाता है यह सर्वविदित है। अब इन धारणाओं को धता बताते हुए महिलाओं ने देहदान के क्षेत्र में भी पुरूषों के समतुल्य अपना स्थान बनाने में सफलता प्राप्त की है। अब बड़ी संख्या में महिलाएं देहदान के फार्म भरने आगे आ रही हैं।

पासरी समुदाय की महिला ने की घोषणा

कुछ समुदायों में आज भी रक्तदान और देहदान करना वर्जित है। ऐसे में पारसी समुदाय की बुजुर्ग महिला ने देहदान की घोषणा कर एक अनुकर्णीय पहल की है। लायंस क्लब के पूर्व अध्यक्ष प्रकाश रामनानी ने बताया कि नीमच धीरे धीरे नेत्रदान की नगरी के साथ देहदान की नगरी के रूप में भी चर्चित होता जा रहा है। अब तक कुल 26 लोगों के देहदान लायंस क्लब को प्राप्त हो चुके हैं। सभी देह मेडिकल साईंस में शोध के लिए उदयपुर मेडिकल कॉलेज भिजवाए जा चुके हैं। एक जुलाई 2016 से 30 जून 2017 के सत्र में 9 लोगों की देह क्लब को प्राप्त हुई है। यह एक रिकार्ड है। आज तक किसी भी क्लब को एक ही सत्र में इतनी बड़ी मात्रा में देहदान प्राप्त नहीं हुए है। इसके साथ ही क्लब को अब तक ४४ लोगों ने देहदान के लिए स्वैच्छा से फार्म भरकर दिए हैं। इनमें महिलाओं की संख्या भी है। पारसी समुदाय की करीब 83 साल की सक्रिय समाजसेविका सोनू जॉल भी लायंस क्लब के माध्यम से अपनी देहदान की घोषणा कर चुकी हैं। इस समुदाय की ओर से यह पहला देहदान है। सिंधी समुदाय की ओर से भी करीब ५ महिलाओं ने सामूहिक रूप से स्वैच्छा से देहदान की घोषणा की है। प्रकाश रामनानी ने बताया कि नेत्रदान और देहदान के क्षेत्र में हमारे परिवार का नाम लिम्का बुक में भी दर्ज है। रामनानी परिवार की ओर से अब तक 18 लोगों ने नेत्रदान और दो लोगों देहदान किए हैं। परिवार की ओर से पहले नेत्रदान वर्ष 1987 में डा. जेडी रामनानी का हुआथा। नीमच के प्रसिद्ध चिकित्सक डा. कमलकुमार चौरडिय़ा ने भी देहदान कर लोगों को इसके लिए प्रेरित किया था।...

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