[ratlam] - मुनिश्री ने कहा युवतियां अधिक भटक रही...ध्यान रहे शिक्षा संस्कार युक्त हो

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रतलाम।महाराष्ट्र समाज भवन पर गुरुवार की शाम आयोजित शंका समाधान कार्यक्रम में मुनिश्री प्रमाण सागर महाराज से रतलाम की श्राविका सरोज पाटनी ने पूछा कि जब लड़का-लड़की को समान रूप से पालन पोषण किया जाता है तो फिर हमारे समाज में लड़कियों को अधिक नहीं पढ़ाने घर में रहने पर जोर क्यों दिया जाता? महाराज ने कहा कि लड़कियों को पढ़ाना बुरा नहीं पढ़ाईये, लेकिन मर्यादाओं की सीमा के साथ। आज के युवक-युवतियों में बहुत बड़ा भटकाव आ रहा है। युवकों से ज्यादा युवतियों में भटकाव आ रहा है।

महाराज ने शंका समाधान कार्यक्रम के मध्य रतलाम में पढ़ाई करने वाली बालिका से पूछा तुम्हारे साथ पढ़ाई करने वाली १० लड़कियां जिन्हे तुम जानती हो, में से कितनी लड़कियां सही सलामत हो सकती है, लड़की ने जवाब दिया ३-४। महाराज ने कहा यानि की ६-७ गड़बड़ है। अगर यहीं हाल है और दो कुल को संभालने वाली लड़कियां भटक जाए तो फिर ऐसी शिक्षा का क्या काम, पढ़ाई का मतलब डिग्री नहीं शिक्षा संस्कार युक्त होनी चाहिए। हमारी कन्याएं ऐसी परिपक्व हो की जीवन में कोई भी समस्या आ जाए दृढ़ता से सामना कर सके। महाराज ने लक्ष्मीबाई और कैकई का उदाहरण भी दिया। समाज प्रवक्ता मांगीलाल जैन ने बताया कि आचार्यश्री सुंदरसागर महाराज का दोपहर में बांसवाड़ा की ओर विहार हुआ। शाम को शंका समाधान कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं अपने प्रश्रों को मुनिश्री के समक्ष रखकर जिज्ञासाओं को शांत किया।...

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