[rewa] - गुप्त नवरात्र आज से प्रारंभ

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रीवा। देवी पुराण की मान्यताओं के अनुसार साल में चार बार नवरात्र होते हैं। जिनमें से दो प्रकट और दो गुप्त नवरात्र कहे जाते हैं। देवी की सिद्धियों को हस्तगत करने के लिए गुप्त नवरात्र का महत्व है। आषाढ़ मास के गुप्त नवरात्रों में शुंभ और निशुंभ का वध करने वाली महासरस्वती देवी की उपासना की जाती है।

शुक्रवार को सुबह 8.16 से गुप्त नवरात्र प्रारंभ हो रहे हैं। देवी शैलपुत्री की उपासना करते हुए घट स्थापना की जाएगी। नौ दिनों तक पूजन-अर्चन का दौर चलेगा। 21 जुलाई को गुप्त नवरात्र का समापन होगा। ज्योतिषी राजेश साहनी के अनुसार चैत्र और आश्विन मास के नवरात्र प्रकट नवरात्र कहे गए हैं। माघ और आषाढ़ के नवरात्र गुप्त नवरात्र कहे गए। प्रकट नवरात्र में देवी की नवधा भक्ति की जाती है अर्थात 9 दिनों के क्रम में देवी के नौ स्वरुपों की साधना उपासना होती है। इसी प्रकार गुप्त नवरात्रों में 10 महाविद्याओं के रूप में देवी पूजी जाती हैं। मान्यता है कि साधना के माध्यम से गुप्त सिद्धियों को अर्जित करने के लिए गुप्त नवरात्रों का विशेष महत्व है। गुप्त नवरात्र मूल रूप से तंत्र साधना के लिए वरदान माने जाते हैं। देवी के 10 महाविद्याओं नामक स्वरूपों में से किसी एक स्वरुप का आराधना की जाती है। इन नवरात्रों में प्रमुख रूप से काली, तारा,त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमला आदि 10 महाविद्याओं में से किसी एक स्वरूप के पूजन एवं साधना का विधान है। इन नवरात्रों में देवी साधना के विशेष मुहूर्त रात्रि कालीन सर्वश्रेष्ठ माने गए हैं।...

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