[rewa] - वेतन विसंगति पर सरकार के खिलाफ फूटा आक्रोश

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स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ कही जाने वाली आशा कार्यकर्ता और आशा सहयोगिनी फिर आंदोलन पर उतर आई हैं। गुरुवार को प्रदर्शन के दौरान कहा कि सरकार को काम चाहिए, पर वेतन नहीं देंगे। वहीं वेटरनरी कॉलेज के डॉक्टरों ने सांतवे वेतनमान की मांग उठाई।

रीवा। आशा ऊषा कार्यकर्ता एवं आशा सहयोगिनी एकता यूनियन के बैनर तले सैकड़ों की संख्या में मौजूद कार्यकर्ताओं ने मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की वादाखिलाफी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वक्ताओं ने कहा कि आशा ऊषा को न्यूनतम मानदेय 18000 रुपए निर्धारित किया जाए। लेकिन जब तक न्यूनतम वेतन तय नहीं होता तब तक देश के अन्य राज्यों की तरह राज्य सरकार हर माह मानदेय की पूरी राशि प्रदान की जाए। प्रोत्साहन राशि का भुगतान बिना किसी काट छांट के समय पर किया जाए। वक्ताओं ने कहा कि छत्तीसगढ़, हरियाणा, बंगाल, केरल, राजस्थान में यह व्यवस्था लागू हैं। आगे कहा कि मध्य प्रदेश सरकार खुद को महिलाओं की हितैषी बताती है लेकिन राहत देने को तैयार नहीं है। आशा ऊषा कार्यकर्ता और आशा सहयोगिनों ने एकत्र होकर निर्णय लिया है कि अगर सरकार 21 जुलाई तक मांगों पर कोई फैसला नहीं लेती है तो 22 जुलाई से चौबीस घंटे की भूख हड़ताल पर चली जाएंगी। प्रदर्शन के दौरान सीटू के जिला महासचिव विद्याशंकर मुफलिस, नौजवान सभा के अमित सोहगौरा, विनय तिवारी, रंजना द्विवेदी, तारा सिंह, मंजूषा शुक्ला, मीरा पांडेय, आशा सिंह, सविता पटेल, ममता सिंह, माया सिंह, अनीता सिंह, दयमंती कुशवाहा, आशा पांडेय, नीलम मिश्रा, रेहाना बेगम, सरोज जायसवाल सहित अन्य मौजूद रहे। ...

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